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उच्चस्तरीय ज्ञान का मानव के विकास में महत्वपूर्ण योगदान: गिरिधर मालवीय
Mon, 17 Jun 2019 09:46 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 17 Jun 2019 09:46 PM IST
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज इस ग्लोबलाईजेशन के दौर में विश्वस्तरीय हावर्ड यूनिर्वसिटी की तर्ज पर विश्वस्तरीय यूनिर्वसिटी बनने की ओर अग्रसर है। इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य ही ज्ञान बांटना है, क्योकि इस दुनिया में समय के कैनवास पर किसी व्यक्ति की हैसियत कामा और फुलस्टाफ से नहीं तय होती है, मनुष्य अपने संकल्प से आगे बढ़ता है। जिसमें उच्चस्तरीय शैक्षिक ज्ञान का महत्वपूर्ण योगदान है। इस सबके लिए विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद का कुशल निर्देशन ही है।
उक्त बातें पूर्व न्यायाधीश गिरिधर मालवीय, कुलाधिपति काशी हिंदु विश्वविद्यालय वाराणसी ने कही। वह नैनी के सरस्वती हाईटेक सिटी स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परीक्षा भवन में विश्वविद्यालय के तीसरे स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रो. राजेंद्र प्रसाद की कार्यकुशलता को देखते हुए लग रहा है कि इन्हें दूसरे कार्यकाल का मौका अवश्य मिलेगा। उन्होंने प्रो. राजेंद्र प्रसाद के कार्यों की सराहना की। प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि करीब 11.64 एकड़ (500 बीघा) में नवसृजित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण हो रहा है। जिसका प्रशासनिक भवन छह तल का बन चुका है। उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। तीन तल का परीक्षा भवन, चार-चार तल के चार एकेडिमक भवनों ेका निर्माण कार्य चल रहा है।
चहारदीवारी पूरी हो गई है। मुख्य द्वार का कार्य चल रहा है। कुलपति आवास बन गया है। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास बन रहे हैं। पुलिस स्टेशन, पोस्टआफिस, बैंक आदि की व्यवस्था भी तीव्र गति से जारी है। उम्मीद है कि छह माह में यहां शैक्षणिक कार्य के अधिकांश काम शुरू हो जाएंगे। कहा कि इस विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न विश्वविद्यालय के आठ पूर्व कुलपति और इतने ही भाषा विशेषज्ञों का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने नवीन परिसर में हो रहे निर्माण कार्य और विभिन्न विद्या शाखाओं के अंतर्गत समाहित विषयों में पठन-पाठन की व्यवस्था तथा परंपरागत एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। प्रो. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा रचित विश्वविद्यालय के कुलगीत को ध्वनि एवं वादन के माध्यम से कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया, जिसकी सबने सराहना की।
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अन्त में कुलसचिव शेषनाथ पांडेय ने उपस्थित अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनीता यादव ने किया। इस दौरान कार्य परिषद सदस्य प्रो. ओम प्रकाश, प्रो. ओंकार सिंह, प्रो. पीसी त्रिवेदी, प्रो. आरएस माली, प्रो. जीके राय, डा. मो. अकरम जावेद, प्रो. सुषमा यादव, प्रो. जीजे रेड्डी, प्रो. गौतम सेन, ले.ज. बीएस नागल, डा. आरपी सिंह, प्रो. आरएस यादव, डा. श्रीराम पाठक, डा. अशोक कुमार श्रीवास्तव तथा विद्या परिषद के सदस्यगण, वित्त अधिकारी धर्मेंद्र प्रकाश त्रिपाठी, उपकुलसचिव प्रभाष द्विवेदी, दीप्ति मिश्रा तथा इलाहाबाद मंडल के चारों जिलों मे स्थापित 608 महाविद्यालयों के प्रबंधक, प्राचार्य, शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में छात्राओं संग सभी ने राष्ट्रगान किया।
प्रो. राजेंद्र प्रसाद पर लिखित पुस्तक प्राज्ञपुरुष का विमोचन
तीसरे स्थापना दिवस के अवसर पर कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद का अभिनंदन ग्रंथ प्राज्ञपुरूष का लोकार्पण मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने किया। बताया गया कि ग्रंथ में 611 पृष्ठों में रचित 116 लेख हैं। जिसका संपादन प्रो. रामहित त्रिपाठी, प्रो. उमाकांत यादव, प्रो. प्रशांत अग्रवाल, डॉ. दुर्गा प्रसाद ओझा, डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, डॉ. दिनकर त्रिपाठी एवं डॉ. रितेश त्रिपाठी आदि ने किया है।
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उक्त बातें पूर्व न्यायाधीश गिरिधर मालवीय, कुलाधिपति काशी हिंदु विश्वविद्यालय वाराणसी ने कही। वह नैनी के सरस्वती हाईटेक सिटी स्थित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय के नवनिर्मित परीक्षा भवन में विश्वविद्यालय के तीसरे स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रो. राजेंद्र प्रसाद की कार्यकुशलता को देखते हुए लग रहा है कि इन्हें दूसरे कार्यकाल का मौका अवश्य मिलेगा। उन्होंने प्रो. राजेंद्र प्रसाद के कार्यों की सराहना की। प्रो. राजेंद्र प्रसाद ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि करीब 11.64 एकड़ (500 बीघा) में नवसृजित प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण हो रहा है। जिसका प्रशासनिक भवन छह तल का बन चुका है। उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। तीन तल का परीक्षा भवन, चार-चार तल के चार एकेडिमक भवनों ेका निर्माण कार्य चल रहा है।
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चहारदीवारी पूरी हो गई है। मुख्य द्वार का कार्य चल रहा है। कुलपति आवास बन गया है। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास बन रहे हैं। पुलिस स्टेशन, पोस्टआफिस, बैंक आदि की व्यवस्था भी तीव्र गति से जारी है। उम्मीद है कि छह माह में यहां शैक्षणिक कार्य के अधिकांश काम शुरू हो जाएंगे। कहा कि इस विश्वविद्यालय में देश के विभिन्न विश्वविद्यालय के आठ पूर्व कुलपति और इतने ही भाषा विशेषज्ञों का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने नवीन परिसर में हो रहे निर्माण कार्य और विभिन्न विद्या शाखाओं के अंतर्गत समाहित विषयों में पठन-पाठन की व्यवस्था तथा परंपरागत एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। प्रो. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा रचित विश्वविद्यालय के कुलगीत को ध्वनि एवं वादन के माध्यम से कार्यक्रम में प्रस्तुत किया गया, जिसकी सबने सराहना की।
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अन्त में कुलसचिव शेषनाथ पांडेय ने उपस्थित अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनीता यादव ने किया। इस दौरान कार्य परिषद सदस्य प्रो. ओम प्रकाश, प्रो. ओंकार सिंह, प्रो. पीसी त्रिवेदी, प्रो. आरएस माली, प्रो. जीके राय, डा. मो. अकरम जावेद, प्रो. सुषमा यादव, प्रो. जीजे रेड्डी, प्रो. गौतम सेन, ले.ज. बीएस नागल, डा. आरपी सिंह, प्रो. आरएस यादव, डा. श्रीराम पाठक, डा. अशोक कुमार श्रीवास्तव तथा विद्या परिषद के सदस्यगण, वित्त अधिकारी धर्मेंद्र प्रकाश त्रिपाठी, उपकुलसचिव प्रभाष द्विवेदी, दीप्ति मिश्रा तथा इलाहाबाद मंडल के चारों जिलों मे स्थापित 608 महाविद्यालयों के प्रबंधक, प्राचार्य, शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में छात्राओं संग सभी ने राष्ट्रगान किया।
प्रो. राजेंद्र प्रसाद पर लिखित पुस्तक प्राज्ञपुरुष का विमोचन
तीसरे स्थापना दिवस के अवसर पर कुलपति प्रो. राजेन्द्र प्रसाद का अभिनंदन ग्रंथ प्राज्ञपुरूष का लोकार्पण मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गिरिधर मालवीय ने किया। बताया गया कि ग्रंथ में 611 पृष्ठों में रचित 116 लेख हैं। जिसका संपादन प्रो. रामहित त्रिपाठी, प्रो. उमाकांत यादव, प्रो. प्रशांत अग्रवाल, डॉ. दुर्गा प्रसाद ओझा, डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, डॉ. दिनकर त्रिपाठी एवं डॉ. रितेश त्रिपाठी आदि ने किया है।