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छलावा बना हाइकोर्ट का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 28 Apr 2020 07:38 PM IST
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high court
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अतिआवश्यक मुकदमो की सुनवाई वकीलों के लिए छलावा साबित हो रही है। सिस्टम सही तरीके से काम न करने के कारण इसके जरिये वकील मुकदमे पर बहस नहीं कर पा रहे हैं। सिस्टम की अनिश्चितता को लेकर एडवोकेट एसोसिएशन के पूर्व महासचिव अरूण के सिंह देशवाल ने मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर को पत्र लिखकर व्यवस्था में सुधार की मांग की है। देशवाल का कहना है कि उन्हें हाईकोर्ट से उनके द्वारा दाखिल दो आपराधिक याचिकाओं की सुनवाई की तिथि की सूचना दी गयी और कहा गया कि सुनवाई के आधे घंटे पहले लिंक भेजा जायेगा, जिससे वीडियो कान्फ्रेन्सिंग से सुनवाई हो सकेगी। किन्तु ऐसा नहीं किया गया और याचिका को सुनवाई के लिए 3 मई को पेश करने का आदेश दिया गया है। मंगलवार को अधिवक्ता महेश शर्मा का भी केस लगा था। हाइकोर्ट से मैसेज आया कि आधे घंटे में लिंक भेजा जायेगा, महेश अपने लैपटॉप के साथ लिंक का इंतज़ार करते रहे मगर हाइकोर्ट से दूसरा मैसेज नहीं आया। अधिवक्ता दिनेश राय और दूसरे कई वकीलों के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। ऐसे ही वेबसाइट पर लंबित बैकलाग फ्रेश बेल अर्जी की सुनवाई की प्रार्थना की गयी ।एक हफ्ते बाद दुबारा अनुरोध किया गया किन्तु न्यायालय प्रशासन ने कोई जवाब नहीं दिया। देशवाल कि कहना है कि इन वजहों से आर्थिक संकट से जूझ रहे वकीलों पर वादकारी का दबाव है और मुकदमे की सुनवाई की कोई सूचना न मिल पाने से अनिश्चितता के कारण निराशा बढ़ रही है। वकीलों का कहना है उनकी अर्जेंसी के प्रार्थना पत्र पर हाइकोर्ट की ओर से जवाब नहीं आता है। मुख्य न्यायाधीश से सुनवाई व्यवस्था को सुधारने के लिए उचित कार्रवाई करने की मांग की गयी है। कारगर है जिस्ती सॉफ्टवेर हाइकोर्ट द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए लाया गया जिस्ती मीट सॉफ्टवेर काफी कारगर बताया जा रहा है। वकीलों का भी अनुभव इसे लेकर अच्छा है। अधिवक्ता महेश शर्मा कहते हैं कि इसके जरिये बिना रुकावट के लिंक जुड़ जाता है। आवाज़ भी काफी स्पष्ट होती है, जिससे एक दूसरे की बात सुनने में कोई परेशानी नहीं होती है। सॉफ्टवेर को मोबाइल, टेबलेट या कंप्यूटर के जरिये डाउनलोड कर मुकदमा बहस किया जा सकता है।
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