{"_id":"5e85d57d8ebc3e6f945b5d89","slug":"high-court158","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court Allahabad; फाइल,बहस और पेशी के बिना भी मिल रहा न्याय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court Allahabad; फाइल,बहस और पेशी के बिना भी मिल रहा न्याय
विज्ञापन
प्रयागराज। न फाइल , न बहस , ना वकीलों, वादकारियो की भीड़, फिर भी हर जरूरतमंद को मिल रहा है न्याय । यह नजारा इन दिनों प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत इलाहाबाद हाईकोर्ट का है। कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर किए गए लॉक डाउन से इलाहाबाद हाईकोर्ट भी प्रभावित है। अदालत अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई है। मगर कोई भी जरूरतमंद न्याय पाने से वंचित ना हो इसके लिए न्यायपालिका ने अपना तरीका बदल दिया है। मुकदमों की सुनवाई के परंपरागत तरीकों में ढील देते हुए तकनीक का उपयोग किया जा रहा है । अति आवश्यक मुकदमों की सुनवाई की ऑनलाइन व्यवस्था कर दी गई मुकदमों की सुनवाई की ऑनलाइन व्यवस्था कर दी गई व्यवस्था कर दी गई है। ई-मेल से दाखिल हो रही है याचिकाएं अति आवश्यक मामलों में याचिका सीधे ईमेल के जरिए हाईकोर्ट भेजी जाती है, साथ में कारण बताते हुए यह प्रार्थना की जाती है कि न्याय हित में तत्काल सुनवाई कर आदेश देना जरूरी है। कोर्ट इसका संज्ञान लेकर यदि आवश्यक समझती है तो दूसरे है तो दूसरे पक्ष को ई-मेल से ही नोटिस भेजकर नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने को कहती है । सरकार भी ईमेल ईमेल के जरिए अपना पक्ष हाई कोर्ट में पेश करती है। दोनों पक्षों की ऑनलाइन दलीलों पर विचार करने के बाद कोर्ट उचित आदेश पारित करती है है। सर्टिफाइड कॉपी पेश करने में छूट हाईकोर्ट ने मौजूदा परिस्थियों को देखते हुए अपने आदेश की सर्टिफाइड कॉपी प्रस्तुत करने से छूट दी है। नई व्यवस्था की गई है की हाई कोर्ट की वेबसाइट से आदेश की प्रति डाउनलोड कर प्रस्तुत की जाएगी। इस प्रकार डाउनलोड की गई आदेश की प्रति पर वादकारी के वकील अपने हस्ताक्षर के साथ संबंधित अधिकारों को पेश करेंगे। ऑनलाइन ही प्राप्त किए जा रहे हैं निर्देश राज्य सरकार और अन्य संस्थाएं भी कोर्ट में जवाब दाखिल करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों से ऑनलाइन निर्देश प्राप्त कर रहे हैं। इसके लिए व्हाट्सएप और ईमेल का सहारा लिया जा रहा है । फैसले जिहोंने दी राहत हाई कोर्ट ने लॉक डाउन के दौरान आम वादकारी और जनता को राहत देने वाले आदेश दिए है। \n1 - लॉक डाउन के दौरान स्वप्रेरित जनहित याचिका पर आम लोगों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं करने का सरकार को निर्देश दिया है ।\n2 कोर्ट ने लॉक डाउन के दौरान सभी प्रकार के मुकदमो में पारित अंतरिम आदेशों की अवधि अगले एक माह के लिए बढ़ा दी है। \n3- कोर्ट के आदेश से होने वाली वसूली ध्वस्तीकरण, और बेदखली आदि पर भी रोक लगा दी \n4- जिनमें मुकदमो में अपील, निगरानी आदि दाखिल करने की समय सीमा समाप्त हो रही थी उसे अगले एक माह के लिए बढ़ा दिया।\n5- जमानत अर्जी ओ के जरिए कोर्ट ने अनावश्यक रूप से जेल में बंद कई लोगों को राहत दी है तथा उनकी जमानत मंजूर कर जेल से रिहा करने का आदेश दिया।\n 6-गिरफ्तारी की आशंका वाले मामलों में भी कोर्ट ने अर्जेंसी देखते हुए तत्काल आदेश देकर कई वादकारियो की गिरफ्तारी पर रोक लगाई है ।\n7- लॉक डाउन के दौरान 7 साल से कम सजा वाले मामलों में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों की रिहाई का आदेश दिया है। \n8- 94 साल के वृद्ध बंदी की उम्र कैद की सजा को निलंबित करते हुए कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश दिया \n9- 95 साल की जेल में बंद महिला को भी राहत देते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया। \n\nइस तरह दाखिल हो सकेगी न लाइन याचिका\n\nइलाहाबाद हाईकोर्ट के निबंधक शिष्टाचार आशीष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार अति आवश्यक मामलों के लिए पूर्वान्ह 10 बजे से 11 बजे के बीच मुकदमा दाखिल कर सुनवाई के लिए अनुरोध करना होगा। इस दौरान नियमित रूप से मुकदमे दाखिल नहीं होगे। कुछ अधिकारियों को नामित किया गया है जो अतिआवश्यक मुकदमाँ की सुनवाई के अनुरोध पर व्यवस्था करेंगे। उनके मोबाइल पर अनुरोध किया जा सकता है। सुनवाई का अनुरोध हाईकोर्ट के संयुक्त निबंधक ( न्यायिक व लिस्टिंग) इलाहाबाद के मोबाइल नंबर 9532693559, संयुक्त निबंधक (न्यायिक व आपराधिक) इलाहाबाद के मोबाइल नंबर 9473838827, निबंधक (न्यायिक व लिस्टिंग) लखनऊ के मोबाइल नंबर 9415028118 या इनकी अनुपस्थिति में निबंधक न्यायिक स्टेशनरी के मोबाइल नंबर 9412711100 पर कॉल किया जा सकेगा। ये अधिकारी संबंधित न्याय पीठ से अनुमति लेकर कॉल करने वाले को सूचित करेंगे। \n
विज्ञापन