फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court to the one who has been demanding compassionate appointment for 23 years

अहम फैसला : 23 वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति की मांग करने वाले को हाईकोर्ट से झटका

Fri, 12 Aug 2022 10:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 12 Aug 2022 10:26 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने जनपद जौनपुर के संजय कुमार सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची को वर्ष 1990 में राज्य सरकार के कर्मचारी राम अचल सिंह द्वारा पुत्र के रूप में गोद लिया गया था।

विज्ञापन
High Court to the one who has been demanding compassionate appointment for 23 years
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 23 वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे दत्तक पुत्र को राहत देने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची ने जिस वर्ष नियुक्ति की मांग की थी, उस समय मृतक आश्रित नियमावली में दत्तक पुत्र को रोजगार दिए जाने का अधिकार शामिल नहीं था। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि नियमावली के अंतर्गत एक सीमित समय सीमा में ही आवेदन किया जा सकता है।
विज्ञापन

 


यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने जनपद जौनपुर के संजय कुमार सिंह की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। याची को वर्ष 1990 में राज्य सरकार के कर्मचारी राम अचल सिंह द्वारा पुत्र के रूप में गोद लिया गया था। पिता की 1995 में मृत्यु के पश्चात याची ने चार वर्ष बाद विभाग के समक्ष रोजगार आवेदन दिया था। 2003 में विभाग ने संजय के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि दत्तक पुत्र को मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी नहीं दी जा सकती है। उक्त आदेश को इस याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी।

विज्ञापन

अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा भारत सरकार बनाम पी वेंकटेश एवं सेंट्रल कोलफील्ड बनाम पार्डन ऑरोन केस में अभिनिर्धारित विधि सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य विपदाग्रस्त परिवार को तत्काल आर्थिक राहत प्रदान कर  संकट से उबारना होता है। अनुकंपा रोजगार का अर्थ यह नहीं कि भविष्य में इसकी मांग कभी भी कर ली जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि याची ने अपने पिता की मृत्यु के चार वर्ष बाद नौकरी का दावा किया था, इसलिए स्पष्ट है कि याची को तत्क्षण रोजगार की आवश्यकता नहीं थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed