फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: The tenant has no right to oppose the demolition of a dilapidated building

High Court : किरायेदार को कोई हक नहीं कि वह जर्जर भवन गिराने का विरोध करे, जिंदगी की सुरक्षा सबसे बड़ी

Sat, 12 Jul 2025 02:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 12 Jul 2025 02:54 PM IST
सार

Allahabad High Court : याची का दावा है कि उसका भवन 100 साल पुराना है। जर्जर हालत में है। उसने इसके पुनर्निर्माण के लिए भवन के ध्वस्तीकरण की अर्जी नगर निगम अलीगढ़ में दिया था। अधिकारियों ने भवन को गिरने की अनुमति दे दी लेकिन भवन में रह रहे किरायेदारों के विरोध के कारण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पा रही। इस पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

विज्ञापन
High Court: The tenant has no right to oppose the demolition of a dilapidated building
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किरायेदार को कोई हक नहीं कि वह जर्जर भवन गिराने का विरोध करे। जिंदगी की सुरक्षा किरायेदारी के अधिकारों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने अलीगढ़ निवासी अशोक कुमार गुप्ता की याचिका पर की है। कोर्ट ने नगर निगम अलीगढ़ को याची के जर्जर को गिराने की इजाज़त दे दी।

विज्ञापन


याची का दावा है कि उसका भवन 100 साल पुराना है। जर्जर हालत में है। उसने इसके पुनर्निर्माण के लिए भवन के ध्वस्तीकरण की अर्जी नगर निगम अलीगढ़ में दिया था। अधिकारियों ने भवन को गिरने की अनुमति दे दी लेकिन भवन में रह रहे किरायेदारों के विरोध के कारण ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हो पा रही। इस पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
विज्ञापन


याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मानसून के आने पर भवन के गिरने की आशंका है। इससे जनहानि हो सकती है लेकिन किरायेदार इसका विरोध कर रहे हैं। लिहाजा, उन्हें भवन से बेदखल कर ध्वस्तीकरण की इजाजत दी जानी चाहिए। नगर निगम की ओर से भी यही दलील शपथपत्र में दोहराई गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


नगर आयुक्त ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया कि आगामी मानसून के मौसम में भवन गिरने से जनहानि की आशंका है। लिहाजा, निगम नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए नगर निगम को याची के जर्जर भवन की गिराने की इजाज़त दे दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि ध्वस्तीकरण से पहले किरायेदारों को उनका सामान घर से हटाने का समुचित अवसर प्रदान किया जाए।


कोर्ट की टिप्पणी

जर्जर भवन में रह रहे किरायेदारों के जीवन को खतरे से बचाना किरायेदारी अधिकारों की तुलना में अधिक जरूरी है। किरायेदारी अधिनियम की धारा 21(2) के तहत मकान मालिक मरम्मत, पुनर्निर्माण या ध्वस्तीकरण के लिए किरायेदारों की बेदखली के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 331(1) यह अधिकार देती है कि अगर कोई संरचना किसी के लिए खतरा बन गई तो नगर आयुक्त उसे गिराने का आदेश दे सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed