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हाईकोर्ट : सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थानांतरित किए गए मामले के आदेश की अपील की सुनवाई वहीं होगी, जहां केस स्थानांतरित हुआ
Tue, 22 Feb 2022 11:53 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 22 Feb 2022 11:53 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा सत्र मामले में फैसले और सजा के खिलाफ अपील स्थानांतरी राज्य (उत्तर प्रदेश) के हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य होगी न कि स्थानांतरणकर्ता राज्य (राजस्थान) की। इस मामले में राजस्थान की विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया था।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 406 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट किसी मामले को एक राज्य की अधीनस्थ आपराधिक अदालत से दूसरे राज्य की अधीनस्थ आपराधिक अदालत में स्थानांतरित कर दिया है। तो उस मामले में किसी आदेश के खिलाफ कोई अपील स्थानांतरित हाईकोर्ट में होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश त्रिपाठी की खंडपीठ ने मथुरा के वीरेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में सीबीआई ने प्रारंभिक आपत्ति उठाई थी कि अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष विचार योग्य नहीं है। क्योंकि, मामला राजस्थान का है।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की स्थिति को देखते हुए सीआरपीसी की धारा 406 के तहत यूपी के मथुरा जिला न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया था।
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कोर्ट ने कहा सत्र मामले में फैसले और सजा के खिलाफ अपील स्थानांतरी राज्य (उत्तर प्रदेश) के हाईकोर्ट के समक्ष सुनवाई योग्य होगी न कि स्थानांतरणकर्ता राज्य (राजस्थान) की। इस मामले में राजस्थान की विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया गया था। जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मथुरा जिला न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में मौजूदा मामले में मथुरा कोर्ट द्वारा मुकदमे के बाद आरोप तय किए गए और फैसला दिया गया। जिसके बाद वर्तमान याचिका दायर की गई।
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याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि प्रतिवादियों द्वारा दिए गए तर्क गलत थे। क्योंकि, मामला जो मुख्य रूप से राजस्थान में दर्ज किया गया था। सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया था और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मथुरा में मुकदमे को स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि अपीलकर्ताओं को सत्र न्यायालय मथुरा द्वारा दोषी ठहराया गया था और इस प्रकार अपील राजस्थान हाईकोर्ट के बजाय इलाहाबाद हाईकोर्ट में होगी।