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High Court : मंदिर सार्वजनिक संस्था, हाईकोर्ट ने वाद दायर करने की दी अनुमति

Fri, 15 May 2026 01:06 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 15 May 2026 01:06 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इटावा स्थित प्राचीन रामचंद्र जी महाराज विराजमान मंदिर रामताल के प्रबंधन और संपत्तियों से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

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High Court Temple is a public institution, High Court granted permission to file suit
कोर्ट का आदेश। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इटावा स्थित प्राचीन रामचंद्र जी महाराज विराजमान मंदिर रामताल के प्रबंधन और संपत्तियों से जुड़े विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए प्रथमदृष्टया मंदिर को सार्वजनिक संस्था मानते हुए वादियों को सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा-92 के तहत मूल वाद दायर करने की अनुमति दे दी।

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रामचंद्र जी महाराज विराजमान मंदिर और पांच अन्य ने ट्रायल कोर्ट इटावा में आवेदन दायर कर मंदिर के प्रबंधन के लिए वाद शुरू करने की अनुमति मांगी, जो खारिज हो गई। इसके बाद याचियों हाईकोर्ट में याचिका दायर की। वादियों का कहना था कि सौ वर्ष पुराने इस सार्वजनिक मंदिर का संचालन परंपरागत गुरु-चेला व्यवस्था से होता रहा, लेकिन बाद में कानपुर निवासी प्रतिवादी ने कथित वसीयत और राजस्व अभिलेखों के जरिये खुद को मंदिर का देखरेख करने वाला दर्ज करा लिया।
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आरोप है कि वर्तमान प्रतिवादी मंदिर की भूमि और दुकानों को बेचने की कोशिश कर रहे हैं और व्यवस्थाएं भी ठीक नहीं हैं। वहीं, प्रतिवादियों ने मंदिर और तालाब को अपने परिवार की निजी संपत्ति बताया।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि प्रतिवादियों ने दावों के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए गए। कोर्ट ने माना कि मंदिर सार्वजनिक प्रकृति का है और प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोपों की विस्तृत जांच जरूरी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 92 के तहत अनुमति देते समय केवल प्रथम दृष्टया मामला देखा जाता है। कोर्ट ने मूल वाद दायर करने की अनुमति दे दी। 

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