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लखनऊ में सीएए का विरोध करने वालों का पोस्टर लगाने पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
Sat, 07 Mar 2020 10:32 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 07 Mar 2020 10:32 PM IST
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चौराहों पर लगी होर्डिंग।
- फोटो : amar ujala
लखनऊ में सीएए के विरोध के दौरान हुई हिंसक झड़प के बाद पुलिस और प्रशासन द्वारा आरोपियों की फोटो और पोस्टर सड़क किनारे लगाने की घटना को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। चीफ जस्टिस की बेंच ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेकर लखनऊ के डीएम व डिविजनल पुलिस कमिश्नर से पूछा है कि वह रविवार सुबह 10 बजे हाईकोर्ट को बताएं कि कानून के किस प्रावधान के तहत लखनऊ में इस प्रकार का पोस्टर सड़क पर लगाया जा रहा है।
आज रविवार होने के कारण हाईकोर्ट में अवकाश है, इसके बावजूद हाईकोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा है कि पोस्टरों में इस बात का कहीं जिक्र नहीं है कि किस कानून के तहत ये पोस्टर लगाए गए हैं। हाईकोर्ट का मानना है कि सार्वजनिक स्थान पर संबंधित व्यक्ति की अनुमति के बिना उसका फोटो या पोस्टर लगाना गलत है। यह राइट टू प्राइवेसी (निजता के अधिकार) का उल्लंघन है।
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आज रविवार होने के कारण हाईकोर्ट में अवकाश है, इसके बावजूद हाईकोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा है कि पोस्टरों में इस बात का कहीं जिक्र नहीं है कि किस कानून के तहत ये पोस्टर लगाए गए हैं। हाईकोर्ट का मानना है कि सार्वजनिक स्थान पर संबंधित व्यक्ति की अनुमति के बिना उसका फोटो या पोस्टर लगाना गलत है। यह राइट टू प्राइवेसी (निजता के अधिकार) का उल्लंघन है।
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