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कुपोषण से बच्ची की मौत पर हाईकोर्ट सख्त
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 29 Jul 2017 01:58 AM IST
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कौशाम्बी के असाढ़ा फतेहपुर गांव में बच्ची की कुपोषण से मौत पर हाईकोर्ट बेहद सख्त है। इस मामले में बड़े अफसरों की जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान ही डीएम कौशाम्बी को निर्देश दिया कि अपराह्न साढ़े तीन बजे तक इस मामले की पूरी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए। कोर्ट ने कहा कि छोटे कर्मचारियों के बजाए जिम्मेदार बड़े अफसरों पर कार्रवाई की जाए। मामले की जांच डीपीआरओ से बड़े अफसर से कराई जाए।
विधि छात्र प्रबल प्रताप और अन्य ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया कि समाचार पत्र से कुपोषण से मौत की जानकारी मिलने पर छात्रों की टीम ने मौके पर जाकर तथ्य जुटाए। जो जानकारी मिली उसके मुताबिक पीड़ित के परिवार में आमदनी का कोई जरिया नहीं है। बच्ची का पिता परिवार का भरण पोषण कर पाने में असमर्थ है। बच्ची के दादा भी गंभीर बीमारी से पीड़ित है।
सरकारी योजना के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों को पोषक आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र का दौरा किया तो वहां सिर्फ पंजीरी बांटी जा रही थी। बच्ची का पिता उसे बीमारी की हालत में घर से सात किलोमीटर दूर स्वास्थ्य केंद्र ले गया था । मगर घर लौटने के बाद कुपोषण से बच्ची की मौत हो गई।
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कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए डीएम कौशाम्बी से तत्काल रिपोर्ट मांगी। डीएम ने रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि मामले की जांच की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि इस बात का पता लगाया जाए कि आंगनबाड़ी केंद्र पर पुष्टाहार नहीं मिलने के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं। विशेषकर डीपीआरओ की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जाए।
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विधि छात्र प्रबल प्रताप और अन्य ने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया कि समाचार पत्र से कुपोषण से मौत की जानकारी मिलने पर छात्रों की टीम ने मौके पर जाकर तथ्य जुटाए। जो जानकारी मिली उसके मुताबिक पीड़ित के परिवार में आमदनी का कोई जरिया नहीं है। बच्ची का पिता परिवार का भरण पोषण कर पाने में असमर्थ है। बच्ची के दादा भी गंभीर बीमारी से पीड़ित है।
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सरकारी योजना के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चों को पोषक आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। जब उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र का दौरा किया तो वहां सिर्फ पंजीरी बांटी जा रही थी। बच्ची का पिता उसे बीमारी की हालत में घर से सात किलोमीटर दूर स्वास्थ्य केंद्र ले गया था । मगर घर लौटने के बाद कुपोषण से बच्ची की मौत हो गई।
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कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए डीएम कौशाम्बी से तत्काल रिपोर्ट मांगी। डीएम ने रिपोर्ट दाखिल कर बताया कि मामले की जांच की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि इस बात का पता लगाया जाए कि आंगनबाड़ी केंद्र पर पुष्टाहार नहीं मिलने के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं। विशेषकर डीपीआरओ की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की जाए।