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High Court : बीएचयू की समीक्षा डीपीसी अधिसूचना पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक
Sat, 18 Jul 2026 02:29 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 18 Jul 2026 02:29 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी पद पर पदोन्नति से जुड़े मामले में 22 जून 2026 को जारी समीक्षा विभागीय पदोन्नति समिति (रिव्यू डीपीसी) की अधिसूचना को अगले आदेश तक प्रभावी न किए जाने का निर्देश दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत नर्सिंग अधिकारियों की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी पद पर पदोन्नति से जुड़े मामले में 22 जून 2026 को जारी समीक्षा विभागीय पदोन्नति समिति (रिव्यू डीपीसी) की अधिसूचना को अगले आदेश तक प्रभावी न किए जाने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने अनिल कुमार चौहान एवं पांच अन्य की याचिका पर दिया।
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याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों की नियुक्ति बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ नर्स (वर्तमान में नर्सिंग अधिकारी) के रूप में नियमित चयन प्रक्रिया के तहत हुई थी। इसके बाद नियमित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की 20 नवंबर और 11 दिसंबर 2025 की बैठकों में उन्हें वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी पद पर पदोन्नति के लिए अनुशंसित किया गया।
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इसकी अधिसूचना तीन जनवरी 2026 को जारी हुई थी। बाद में पांच मई 2026 के निर्णय के आधार पर समीक्षा डीपीसी कर 22 जून 2026 को नई अधिसूचना जारी कर दी गई। समीक्षा डीपीसी 10 अगस्त 2010 के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के कार्यालय ज्ञापन के आधार पर की गई। जबकि केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2016 के कार्यालय ज्ञापन में निर्णय लिया था कि सर्वोच्च न्यायालय में संबंधित मामला लंबित रहने तक उक्त कार्यालय ज्ञापन पर भरोसा नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड हाईकोर्ट के 12 मई 2026 के आदेश का भी हवाला दिया।
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प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि समीक्षा डीपीसी में अनुशंसित कर्मचारियों को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। इस पर कोर्ट ने याचियों को एक सप्ताह में उन्हें पक्षकार बनाने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल करने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए प्रतिवादियों को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने और याचियों को उसके बाद दो सप्ताह में प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। साथ ही 22 जून 2026 की अधिसूचना को अगले आदेश तक प्रभावी न किए जाने का अंतरिम आदेश पारित किया है।