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31 साल बाद भी निस्तारित मुकदमे का आदेश पारित न होने पर हाईकोर्ट ने सिविल जज गाजीपुर से मांगा जवाब

Fri, 31 Jul 2020 07:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 31 Jul 2020 07:32 PM IST
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High Court seeks response from Civil Judge Ghazipur after 31 years even after the order of the disposed trial is not passed.
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिविल जज जूनियर डिवीजन मुहम्मदाबाद गाजीपुर से मुकदमे के निस्तारण के 31 साल बाद भी उसका आदेश लागू न होने पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि ऐसी कौन सी वजह है जो 31 साल के लंबे अंतराल के बाद भी कोर्ट अपने आदेश का अनुपालन नहीं करा सकी और इस संबंध में दाखिल इजरा वाद (आदेश के अनुपालन हेतु दाखिल किया जाने वाद) लंबित है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि  भोला बनाम सतीराम के बीच विवाद का फैसला आने के 31 साल बाद भी निष्पादन प्रक्रिया आज भी लंबित है, समाप्त  क्यों नहीं हो सकी।कोर्ट ने 20अ गस्त तक सिविल जज से  रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने राम नारायण सिंह यादव की याचिका पर दिया है। 
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याची के अधिवक्ता का कहना है कि भोला और सतीराम के बीच मुकदमे का फैसला 28 नवंबर 1981को हो गया।ग्राम गंगौली के याची के मकान के कब्जे में विपक्षी सतीराम को हस्तक्षेप करने पर रोक लगा दी गई। अपील भी 1988 में खारिज हो गई।हाईकोर्ट ने 1989 में द्वितीय अपील भी खारिज कर दी। याची ने डिक्री के अनुपालन के लिए इजरा वाद दायर किया।डिक्री का निष्पादन न हो पाने और लंबे समय तक लटकाए रखने के खिलाफ यह याचिका दाखिल की गई है।
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