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UP : हाईकोर्ट ने कहा- सांविधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के नाम के साथ माननीय शब्द लगाना अनिवार्य

Wed, 06 May 2026 05:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 06 May 2026 05:07 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संसद सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री और अन्य सांविधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के नाम के साथ माननीय जैसे सम्मान सूचक शब्द का प्रयोग करना अनिवार्य है।

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High Court says mandatory to word Honourable before the names of persons holding constitutional posts
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संसद सदस्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री और अन्य सांविधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के नाम के साथ माननीय जैसे सम्मान सूचक शब्द का प्रयोग करना अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत नाराजगी या परिचय के आधार पर ऐसे पदाधिकारियों को बिना सम्मान सूचक संबोधन के नहीं लिखा जा सकता। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक आपराधिक याचिका की सुनवाई के दौरान की।

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मथुरा निवासी हर्षित शर्मा और दो अन्य ने विभिन्न आरोपों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि एफआईआर में एक पूर्व केंद्रीय मंत्री का नाम है और उनके नाम के आगे सम्मान सूचक शब्द का प्रयोग नहीं किया गया। इसे गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने जवाब तलब किया था।
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राज्य सरकार की ओर से दाखिल अनुपालन हलफनामे में कहा गया कि मामले में प्रारंभिक जांच के निर्देश दो अप्रैल 2026 को ही मथुरा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दे दिए गए थे। वहीं, शिकायतकर्ता खजान सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें सांसद या पूर्व केंद्रीय मंत्री के लिए सम्मान सूचक शब्द के उपयोग का प्रोटोकॉल पता नहीं था।
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कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि माननीय संबोधन केवल उन्हीं लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो सरकार के तीनों अंगों विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में संप्रभु सांविधानिक दायित्व निभाते हैं। इसमें मंत्री, सांसद, विधायक, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जज, लोकसभा व राज्यसभा के अध्यक्ष आदि शामिल हैं।


इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि कोई भी लोकसेवक, चाहे वह कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो वह माननीय संबोधन का हकदार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा अब समाप्त माना जाएगा। साथ ही, प्रतिवादी की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट को रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया गया है। याचिकाकर्ताओं को एक सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।

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