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UP: हाईकोर्ट ने कहा- पीड़िता व आरोपी ने विवाह कर लिया है और सुखी हैं तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्याय नहीं

Fri, 03 Apr 2026 11:39 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 03 Apr 2026 11:39 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पीड़ित व आरोपी ने विवाह कर लिया है और वे एक सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायसंगत नहीं है।

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High Court said victim and accused have married happy, then continuing the criminal proceedings is not justice
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पीड़ित व आरोपी ने विवाह कर लिया है और वे एक सुखद वैवाहिक जीवन व्यतीत कर रहे हैं तो आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायसंगत नहीं है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दाखिल चार्जशीट और पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने आरोपी की अर्जी दिया है।

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संभल निवासी याची पर एक शिकायतकर्ता ने 2018 में थाना रजपुरा में अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। ट्रायल कोर्ट में मामला लंबित है। याची ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी।

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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता ने पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में किसी भी प्रकार के अपराध या जबरदस्ती से इन्कार कर दिया। उसने अपनी मर्जी से आरोपी के साथ जाने की बात कही है। दोनों ने गाजियाबाद में कोर्ट मैरिज कर ली है।

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पीड़िता ने खुद को बालिग बताया और आरोपी के साथ पत्नी के रूप में रहने की इच्छा जताई। दोनों का विवाह तीन जुलाई 2018 को पंजीकृत हुआ था। ऐसे में लंबित मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि पीड़िता ने आरोपी के साथ स्वेच्छा से जीवन बिताने का निर्णय लिया है और वह अभियोजन का समर्थन नहीं कर रही है तो मुकदमे को जारी रखना केवल समय की बर्बादी होगी। पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट में गवाही के दौरान भी आरोपी पर कोई आरोप नहीं लगाया। पीड़िता के पिता भी इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। इन आधारों पर कोर्ट ने लंबित मामले की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।

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