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हाईकोर्ट ने कहा : बिना काम वेतन देने पर राजकीय खजाने का होगा नुकसान, पूर्व कर्मचारी की याचिका खारिज

Fri, 07 Feb 2025 08:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 07 Feb 2025 08:15 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत में छूट देने से याची को अनुचित लाभ होगा और राज्य के खजाने का नुकसान होगा। याची भ्रष्टाचार के मामले में तीन साल जेल में रहा, इस अवधि का वेतन मांगने का उसे कोई वैध अधिकार नहीं है।

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High Court said: There will be loss to the state exchequer if salary is not given for work, petition of former
अदालत - फोटो : ANI

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत में छूट देने से याची को अनुचित लाभ होगा और राज्य के खजाने का नुकसान होगा। याची भ्रष्टाचार के मामले में तीन साल जेल में रहा, इस अवधि का वेतन मांगने का उसे कोई वैध अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए शिवाकर सिंह की याचिका खारिज कर दी।

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हाथरस निवासी याची बिजली विभाग में कार्यरत थे। इस दौरान एक उपभोक्ता ने कनेक्शन के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए शिकायत की। इसपर भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के पुलिस अधीक्षक ने उनपर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। इसके चलते उन्हें 23 जनवरी 2015 से 18 दिसंबर 2018 तक लगभग तीन साल के लिए जेल में रहना पड़ा। जेल अवधि का वेतन विभाग ने ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत पर देने से इन्कार कर दिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

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न्यायालय ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केवल दुर्लभ मामलों में ही काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत अपवादित किया जाता है। जैसे की कोई नियोक्ता किसी कर्मचारी को काम करने से रोकता है। इस मामले में नियोक्ता ने कर्मचारी को काम करने से न रोका है और न ही आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया है। ऐसे में काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत में छूट दी जाती है तो राज्य के खजाने का बेवजह नुकसान होगा। न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।

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