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हाईकोर्ट ने कहा : फर्जी शादी रोकने के लिए विवाह पंजीकरण नियमों में किया जाए संशोधन

Thu, 22 May 2025 04:23 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 22 May 2025 04:23 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शादी कराने वाले गिरोह और घर से भगाकर शादी के बाद मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम जैसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम 2017 में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं।

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High Court said: Marriage registration rules should be amended to prevent fake marriages
हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शादी कराने वाले गिरोह और घर से भगाकर शादी के बाद मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम जैसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम 2017 में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए छह महीने का समय निर्धारित किया है। कोर्ट ने कहा कि विवाह की वैधता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए नियम में संशोधन करने की आवश्यकता है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने इटावा के शनिदेव व अन्य की याचिका पर दिया। अदालत के समक्ष घर से भागकर शादी करने वाले करीब 125 अलग-अलग मामलों में यह स्पष्ट हुआ कि कई शादियां फर्जी थीं या बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के की गईं। कोर्ट ने पाया कि सुरक्षा के लिए अदालतों में प्रस्तुत विवाह प्रमाणपत्र के साथ पेश किए गए दस्तावेज जाली थे। गवाहों के नाम भी काल्पनिक थे। कई मामलों में विवाह प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्थाओं का कोई अस्तित्व नहीं था।
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कोर्ट ने कहा कि बालिग होने पर सभी को मनपसंद जीवनसाथी चुनने का अधिकार है, लेकिन नियमों की अनदेखी करके नहीं। राज्य और उसके तंत्रों की जिम्मेदारी है कि वह कानून का सख्ती से पालन कराए। विवाह संस्था की अखंडता व पवित्रता की रक्षा करे। नियमों की अनदेखी कर, भागकर विवाह करने के बाद मानव तस्करी, यौन शोषण और जबरन श्रम जैसे मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में शादी पंजीकरण अधिनियम में संशोधन जरूरी है।

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महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को कोर्ट ने दिए सुझाव

कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को 2017 के विवाह पंजीकरण के नियम में संशोधन में कुछ सुझाव भी दिए हैं। कहा, विवाह के लिए धार्मिक रीतिरिवाज व अनुष्ठान का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। विवाह अधिकारियों को आपत्तियां उठाने, संदेह के आधार पर आवेदन अस्वीकार करने और रिकॉर्ड बनाए रखने का अधिकार दिया जाए। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्रों को रोकने के लिए पुजारियों/संस्थाओं को विनियमित करने के लिए कानून बनाया जाए।

विवाह कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही के लिए आयु और निवास प्रमाणपत्र की फोटोकॉपी रखना अनिवार्य किया जाए। फर्जी आयु दस्तावेज को रोकने के लिए पंजीकरण के साथ ऑनलाइन आयु सत्यापन प्रणाली बनाई जाए। विवाह पंजीकरण के लिए वर वधु का आधार प्रमाणीकरण किया जाए। दोनों पक्षों और गवाहों का बायोमीट्रिक डाटा, फोटो, सीबीएसई, यूपी बोर्ड, पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक पोर्टल से आयु का सत्यापन किया जाए। इसके अलावा भागकर शादी करने वाले जोड़ों के वीडियो, फोटो को भी विवाह पंजीकरण में शामिल किया जाए।

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