High Court : हाईकोर्ट ने कहा- देरी से दाखिल पुनर्विचार अर्जियों पर लागू होगा परिसीमा अधिनियम
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब देरी से दाखिल होने वाली पुनर्विचार अर्जी पर परिसीमा अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे। अर्जी दाखिल होने में हुई देरी पर याची को स्पष्टीकरण देते हुए देरी माफी की अर्जी भी दाखिल करनी होगी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में अब देरी से दाखिल होने वाली पुनर्विचार अर्जी पर परिसीमा अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे। अर्जी दाखिल होने में हुई देरी पर याची को स्पष्टीकरण देते हुए देरी माफी की अर्जी भी दाखिल करनी होगी। इस पर विपक्षी को नोटिस जारी कर सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद कोर्ट के आदेश पर ही पुनर्विचार अर्जी सामान्य रूप से सुनवाई के लिए स्वीकार की जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार की अदालत ने बिजनौर निवासी लाल चंद्र की ओर से दाखिल पुनर्विचार अर्जी पर दिया है।
याची लाल चंद्र और विपक्षी मनोज कुमार के बीच वर्ष-2014 से किरायेदारी को लेकर विवाद है। मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर फैसला फरवरी 2025 में आया। इसके खिलाफ लालचंद्र ने जून में पुनर्विचार अर्जी दाखिल की, जबकि नियमानुसार 30 तीन के भीतर अर्जी दाखिल की जानी चाहिए। इसके बावजूद रिपोर्टिंग अनुभाग ने इसे सामान्य अर्जी की तरह सुनवाई के लिए अदालत में अग्रसारित किया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिका में पारित आदेश पर पुनर्विचार अर्जी प्रथम व द्वितीय अपीलों की तरह अदालत में देरी माफी की अर्जी संग दाखिल होनी चाहिए। इस पर भी परिसीमा अधिनियम के प्रावधान को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। कोर्ट ने रिपोर्टिंग अनुभाग की निर्देश दिया कि भविष्य में देरी से दाखिल होने वाली पुनर्विचार अर्जी को त्रुटिपूर्ण श्रेणी में दर्ज किया जाए।