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हाईकोर्ट ने कहा : वकील जांच एजेंसियों से सीधे संवाद नहीं कर सकते, जब तक उन्हें अदालत से अनुमति न मिले

Fri, 15 Nov 2024 11:41 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 15 Nov 2024 11:41 AM IST
सार

गाजियाबाद निवासी पदम सिंघी पर 26 मार्च 2021 को प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत मामला दर्ज किया था। आवेदक सात फरवरी 2024 से जेल में है। आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी।

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High Court said: Lawyers cannot communicate directly with investigating agencies unless they get permission fr
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी वकील जांच अधिकारी व अन्य जांच एजेंसियों से सीधे बातचीत नहीं कर सकता है, जब तक कि अदालत ऐसा आदेश न दे। हालांकि, न्यायमूर्ति समित गोपाल ने यह टिप्पणी कर एसवीओजीएल ऑयल गैस एंड एनर्जी लिमिटेड के संयुक्त प्रबंध निदेशक आरोपी पदम सिंघी को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी।

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गाजियाबाद निवासी पदम सिंघी पर 26 मार्च 2021 को प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत मामला दर्ज किया था। आवेदक सात फरवरी 2024 से जेल में है। आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी।

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इस दौरान आरोपियों के वकील ने ईडी के जांच अधिकारी (आईओ) को दो ईमेल भेजे थे। इसमें उनसे जमानत मामले में जल्द जवाब दाखिल करने का अनुरोध किया था। इस पर न्यायालय ने अधिवक्ता के आचरण पर कड़ी आपत्ति जता कहा कि यदि जवाब दाखिल करने के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है तो सही उपाय यही है कि पीठ को सूचित किया जाए।

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अदालत ने कहा, ई-मेल भेज अधिकारियों को अदालत के आदेश की याद दिलाना और उनसे इसका अनुपालन करने का अनुरोध करना वकीलों के कर्तव्यों के दायर में नहीं है। इस संबंध में न्यायालय ने अधिवक्ताओं के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया के व्यावसायिक आचरण नियमों का भी उल्लेख किया।

नियमों में कहा गया है कि कोई भी वकील किसी भी तरह से विवाद के विषय पर किसी भी पक्ष के साथ संवाद या बातचीत नहीं करेगा, सिवाय उस वकील के माध्यम से। हाईकोर्ट ने आरोपी के वकीलों के खिलाफ टिप्पणी प्रवर्तन निदेशालय के वकीलों की आपत्ति पर की।

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