{"_id":"62b4993fa6bed77d9f3ba3f9","slug":"high-court-said-it-is-not-proper-to-make-exceptions-to-the-conclusion-of-the-trial-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट ने कहा : ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष को अपवाद बनाना उचित नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट ने कहा : ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष को अपवाद बनाना उचित नहीं
Thu, 23 Jun 2022 10:17 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 23 Jun 2022 10:17 PM IST
सार
मामले में गोरखपुर की फैमिली कोर्ट ने याची को भरण-पोषण केलिए पत्नी को पांच हजार रुपये और बेटी को तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। याची ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक मामले में दाखिल याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए निष्कर्ष को अपवाद नहीं बनाया जा सकता है, क्योंकि याची संपन्न व्यक्ति है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की खंडपीठ ने गोरखपुर के प्रशांत राय की याचिका को खारिज करते हुए दिया।
विज्ञापन
मामले में गोरखपुर की फैमिली कोर्ट ने याची को भरण-पोषण केलिए पत्नी को पांच हजार रुपये और बेटी को तीन हजार रुपये प्रतिमाह देने का आदेश दिया था। याची ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट केसामने तथ्य आया कि पति ने पत्नी और बेटी को घर से बाहर निकाल दिया। इस वजह से पत्नी और बेटी के जीवन निर्वाह पर संकट खड़ा हो गया।
विज्ञापन
रिकॉर्ड में आया कि याची कृषि कार्य कर रहा है। वह जीप का मालिक है और उसकेपास चार मंजिला घर भी है। इसके साथ ही वह सरकारी कर्मचारी है। उसकेपास एक निश्चित वेतन है। कोर्ट में याची की ओर से कोई भरण-पोषण की रकम को अदा करने के लिए कोई उचित आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका। कोर्ट ने इन तथ्यों को देखते हुए याचिका खारिज कर दी।
विज्ञापन