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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court said: If there is no information about the pending case, one cannot be held guilty of hiding

हाईकोर्ट ने कहा : लंबित मुकदमे की जानकारी न होने पर तथ्य छुपाने का दोषी नहीं ठहरा सकते

Mon, 23 Dec 2024 04:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 23 Dec 2024 04:07 PM IST
सार

बलिया निवासी मिथिलेश का पुलिस कांस्टेबल और कांस्टेबल पीएसी (पुरुष) सीधी भर्ती-2015 में कांस्टेबल के पद पर चयन हुआ था। ज्वॉइनिंग के समय शपथ पत्र दिया है कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। उसने 4वीं बटालियन पीएसी धूमनगंज, प्रयागराज में 14 जुलाई 2018 को ज्वॉइन कर लिया।

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High Court said: If there is no information about the pending case, one cannot be held guilty of hiding
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लंबित आपराधिक मुकदमे की जानकारी नहीं होने पर व्यक्ति को तथ्य छुपाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी कर पीएसी कांस्टेबल के खिलाफ बर्खास्तगी को रद्द कर तत्काल सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने मिथिलेश कुमार सिंह की याचिका को स्वीकार कर यह आदेश दिया।

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बलिया निवासी मिथिलेश का पुलिस कांस्टेबल और कांस्टेबल पीएसी (पुरुष) सीधी भर्ती-2015 में कांस्टेबल के पद पर चयन हुआ था। ज्वॉइनिंग के समय शपथ पत्र दिया है कि उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। उसने 4वीं बटालियन पीएसी धूमनगंज, प्रयागराज में 14 जुलाई 2018 को ज्वॉइन कर लिया। 10 महीने की सेवा पूरी होने के बाद 30 नवंबर 2019 को लंबित आपराधिक मामलों को छुपाने के आधार पर उसे बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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अधिवक्ता संजीव सिंह ने दलील दी कि आवेदन पत्र जमा करने के वक्त और शामिल होने के समय याची को उसके खिलाफ किसी भी आपराधिक मामले के लंबित होने की जानकारी नहीं थी। ज्वॉइनिंग से बलिया के पूर्व एसपी ने चरित्र प्रमाणपत्र का सत्यापन किया था, जिसमें कुछ भी प्रतिकूल नहीं पाया गया। न्यायालयों के आदेशों का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि आपराधिक कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं होने पर तथ्य छिपाने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। विवादित आदेश को रद्द किया जाना चाहिए। शासकीय अधिवक्ता ने याचिका का विरोध किया।
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कोर्ट ने विवादित आदेश को रद्द कर दिया। वहीं, प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत करने की तारीख से सभी परिणामी लाभों के साथ याची को तुरंत सेवा में बहाल करें। यह भी कहा कि यदि वह आपराधिक कार्यवाही में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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