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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court said: Do not act like a mute spectator or tape recorder while recording the statement of a dissiden

हाईकोर्ट ने कहा : पक्षद्रोही का बयान दर्ज करते वक्त मूकदर्शक या टेप रिकॉर्डर की तरह न करें काम

Sat, 01 Feb 2025 11:31 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 01 Feb 2025 11:31 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए ट्रायल कोर्ट पर तल्ख टिप्पणी की है। कहा कि पक्षद्रोही का बयान दर्ज करते वक्त अदालत को मूक दर्शक या टेप रिकॉर्डर की तरह काम नहीं करना चाहिए।

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High Court said: Do not act like a mute spectator or tape recorder while recording the statement of a dissiden
अदालत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी की जमानत मंजूर करते हुए ट्रायल कोर्ट पर तल्ख टिप्पणी की है। कहा कि पक्षद्रोही का बयान दर्ज करते वक्त अदालत को मूक दर्शक या टेप रिकॉर्डर की तरह काम नहीं करना चाहिए। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने प्रयागराज निवासी सुशील यादव की ओर से दाखिल अपील को स्वीकार करते हुए की।

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कोर्ट ने कहा कि पक्षद्रोही का बयान दर्ज करते हुए कोर्ट को सच्चाई की तह तक जाने के लिए सजगता पूर्वक खुद भी गवाह से प्रासंगिक सवाल पूछने चाहिए। इसके बाद बयान से मुकरने वाले गवाह के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही भी करनी चाहिए, लेकिन मामले में बयान दर्ज करते वक्त ट्रायल कोर्ट ने ऐसा नहीं किया।

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मामला प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र का है। जून 2024 में आरोपी व एक अन्य के खिलाफ नाबालिग के साथ दुष्कर्म और दलित उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया।

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ट्रायल कोर्ट में दर्ज हुए बयान में पीड़िता अपने बयान से मुकर गई। इसी आधार पर याची ने जमानत की मांग कर पहले सत्र अदालत और फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची निर्दोष है। पीड़िता विवेचना और कलमबंद बयानों में लगाए आरोपों से ट्रायल कोर्ट में मुकर चुकी है। इस पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ओर से जमानत रद्द करने के आदेश को निरस्त कर याची की अपील स्वीकार कर ली।

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