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High Court : जीपीएफ भुगतान की देरी पर सेवानिवृत्त कर्मचारी को ब्याज का अधिकार
Thu, 16 Apr 2026 02:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 16 Apr 2026 02:58 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि देरी के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारी जिम्मेदार नहीं है तो वह जीपीएफ भुगतान में विलंब पर ब्याज का अधिकारी है।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि देरी के लिए सेवानिवृत्त कर्मचारी जिम्मेदार नहीं है तो वह जीपीएफ भुगतान में विलंब पर ब्याज का अधिकारी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि सेवानिवृत्त सहायक कमांडेंट को उसके भविष्य निधि (जीपीएफ) के भुगतान में देरी के लिए आठ प्रतिशत वार्षिक की दर से छह सप्ताह में ब्याज का भुगतान किया जाए।
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यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने प्रयागराज के बृज किशोर तिवारी की याचिका पर दिया है। याची ने सेवानिवृत्त के बाद जीपीएफ के विलंबित भुगतान पर ब्याज की मांग की थी, जिसे वरिष्ठ लेखा अधिकारी, गृह मंत्रालय की ओर से 30 जनवरी 2026 को खारिज कर दिया गया था। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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अधिवक्ता मलिक जुनैद अहमद ने दलील दी कि याची केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में सहायक कमांडेंट (एम) के पद से 31 अगस्त 2024 को सेवानिवृत्त हुआ था। जीपीएफ का भुगतान हो जाना चाहिए था पर ऐसा नहीं हुआ। विभाग की ओर से देरी के कारण उसे 86,90,698 रुपये की राशि का भुगतान तीन महीने और पांच दिन बाद पांच दिसंबर 2024 को किया गया।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि विभाग ने खुद स्वीकार किया कि भुगतान की प्रक्रिया सेवानिवृत्ति से पहले ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन अधिकारियों की सुस्ती के कारण समय पर पैसा जारी नहीं हो सका।