{"_id":"6ac6365ddda5660bf50b1f15","slug":"high-court-relief-for-two-retired-bsnl-employees-service-to-be-counted-from-1984-2026-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट : बीएसएनएल के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत, 1984 से जोड़ी जाएगी सेवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट : बीएसएनएल के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत, 1984 से जोड़ी जाएगी सेवा
Wed, 07 Oct 2026 05:39 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 07 Oct 2026 05:39 PM IST
सार
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने अलीगढ़ के बीएसएनएल के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत दी है। उनकी सेवा को 15 मार्च 1984 से पेंशन के लिए अर्हक सेवा मानने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने अलीगढ़ के बीएसएनएल के दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत दी है। उनकी सेवा को 15 मार्च 1984 से पेंशन के लिए अर्हक सेवा मानने का आदेश दिया है। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति ओम प्रकाश ने बीएसएनएल के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिससे दोनों की पेंशन पर प्रतिकूल असर पड़ा था।
विज्ञापन
शोभासिंह यादव और रामकुमार गुप्ता की नियुक्ति दूरसंचार विभाग में टेलीफोन ऑपरेटर के पद पर 28 नवंबर 1983 को हुई थी। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने 15 मार्च 1984 को अलीगढ़ में कार्यभार संभाला। 17 फरवरी 1989 को नियमित वेतनमान मिलने के साथ जीपीएफ कटौती शुरू हुई। बाद में दोनों को पदोन्नति मिली और वे 31 जनवरी 2020 को ऑफिस सुपरिटेंडेंट पद से सेवानिवृत्त हुए।
विज्ञापन
विभाग ने सेवानिवृत्ति के बाद 15 मार्च 1984 से सेवा को पेंशन के लिए अर्हक मानने से इन्कार कर दिया था। बीएसएनएल का कहना था कि शुरुआती अवधि रिजर्व ट्रेनिंग पूल (आरटीपी) की थी और नियमित नियुक्ति 17 फरवरी 1989 से हुई। इसे उन्होंने कैट में चुनौती दी।
विज्ञापन
कैट ने कहा कि विभाग ने स्वयं आरटीपी अवधि को सेवा में जोड़कर वेतन प्रगति निर्धारित की थी। ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद इसके विपरीत रुख नहीं अपनाया जा सकता। अधिकरण ने पेंशन 31 जनवरी 2020 के अनुसार बहाल करने और जून 2020 से काटी गई राशि लौटाने का आदेश दिया। बकाया एरियर का भुगतान जीपीएफ दर से ब्याज सहित तीन माह में करने को कहा गया।