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High Court : नाबालिग बच्चों के हिस्से की संपत्ति बेचने की अनुमति से कोर्ट का इन्कार

Sat, 04 Apr 2026 05:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 04 Apr 2026 05:28 PM IST
सार

जिला अदालत ने पैतृक संपत्ति में से नाबालिग बच्चों के हिस्से को बेचने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि केवल राजस्व अभिलेख (खसरा) में नाम दर्ज होने से स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह-अष्टम ने दिया है।

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High Court refuses permission to sell property belonging to minor children
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिला अदालत ने पैतृक संपत्ति में से नाबालिग बच्चों के हिस्से को बेचने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने कहा कि केवल राजस्व अभिलेख (खसरा) में नाम दर्ज होने से स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। यह आदेश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह-अष्टम ने दिया है।

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करेली निवासी याची सैय्यद मजहर अली रिजवी ने पैतृक संपत्ति में से अपने नाबालिग बच्चों के कथित हिस्से वाले गुरु तेग बहादुर नगर (करेली) स्थित मकान को बेचने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि वह नोएडा में नया मकान खरीदना चाहते हैं, जिसके लिए इस संपत्ति को बेचना जरूरी है। साथ ही आश्वासन दिया था कि नई संपत्ति में भी बच्चों को बराबर का हिस्सा दिया जाएगा।
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अदालत ने कहा कि संबंधित मकान याची को अपने पिता से विरासत में मिला था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नाबालिग बच्चों का स्वामित्व किस कानूनी प्रक्रिया जैसे बैनामा, वसीयत या हिबा से स्थापित हुआ। अदालत ने कहा कि केवल खसरे में नाम दर्ज होने से स्वामित्व सिद्ध नहीं होता, इसलिए नाबालिगों के हिस्से को बेचने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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अदालत ने कहा कि याची स्वयं बालिग है। वह अपने हिस्से के संबंध में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए सक्षम है और इसमें न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, नाबालिग बच्चों के संबंध में मांगी गई अनुमति स्वीकार नहीं की जा सकती।

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