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हाईकोर्ट ने जनहित याचिका : बिना जांच कराए ही शिफ्ट की गई विद्युत लाइन को कर दिया चालू

Sat, 19 Feb 2022 12:46 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 19 Feb 2022 12:46 AM IST
सार

कहा गया है कि लाइन शिफ्टिंग को बिना जांच के ही चालू कर दिया गया है, जबकि लाइन चालू करने से पहले डायरेक्टर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी की अनुमति जरूरी है। विद्युत लाइन चालू करने से पहले उसकी स्टैंडर्ड मानक पर जांच किया जाना आवश्यक था। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ऐसा किया गया है।

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High Court Public Interest Litigation: Shifted without investigation, Electricity line turned on
कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।) - फोटो : iStock

विस्तार

स्मार्ट सिटी के अंतर्गत सड़कों के चौड़ीकरण के दौरान शिफ्ट की गई विद्युत लाइन को बिना इलेक्ट्रिकल क्लीयरेंस (विद्युत सुरक्षा अनापत्ति) के चालू किए जाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

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कहा गया है कि लाइन शिफ्टिंग को बिना जांच के ही चालू कर दिया गया है, जबकि लाइन चालू करने से पहले डायरेक्टर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी की अनुमति जरूरी है। विद्युत लाइन चालू करने से पहले उसकी स्टैंडर्ड मानक पर जांच किया जाना आवश्यक था। लेकिन नियमों को ताक पर रखकर ऐसा किया गया है।
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अरुण मिश्रा की ओर से दाखिल याचिका में स्मार्ट सिटी के तहत शहर की चौड़ी की गईं 12 सड़कों का जिक्र किया गया है। कहा गया है कि इन सड़कोें के चौड़ीकरण के लिए कुल 30 करोड़, 15 लाख रुपये का बजट खर्च किया गया है। इसमें विद्युत लाइन शिफ्टिंग का काम भी शामिल था।
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प्रयागराज विकास प्राधिकरण की ओर से स्मार्ट सिटी योजना के तहत कराए गए इस काम में विद्युत पोल, तार से लेकर अन्य बिजली के उपकरणों को शिफ्ट कर दिया गया और बिना उसकी जांच कराए गए लाइन चालू कर दी गई।




याची का कहना है कि शिफ्टिंग के बाद विद्युत लाइन चालू करने केलिए पहले डायरेक्टर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी की अनुमति की जरूरत है। लेकिन, उनकी अनुमति ली ही नहीं गई। याची ने इसे गलत बताया है। मामले में डायरेक्टर इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, प्रयागराज विकास प्राधिकरण और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को पार्टी बनाया गया है।  

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