फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Presenting forged documents in court is an attack on judicial sanctity, husband petition

High Court : अदालत में जाली दस्तावेज पेश करना न्यायिक पवित्रता पर हमला, आय छिपाने पर पति की याचिका खारिज

Thu, 11 Dec 2025 02:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 11 Dec 2025 02:58 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत में जाली दस्तावेज पेश करना न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर हमला है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की अदालत ने गौतमबुद्ध नगर निवासी गौतम मेहता की याचिका रद्द कर दी।

विज्ञापन
High Court: Presenting forged documents in court is an attack on judicial sanctity, husband petition
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अदालत में जाली दस्तावेज पेश करना न्यायिक प्रक्रिया की पवित्रता पर हमला है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की अदालत ने गौतमबुद्ध नगर निवासी गौतम मेहता की याचिका रद्द कर दी। उन पर बेटे के भरण-पोषण से जुड़े मुकदमे में वास्तविक आय छिपाने के लिए बैंक के गलत विवरण को पेश करने का आरोप है। ट्रायल कोर्ट ने समन जारी किया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

विज्ञापन


याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि अदालत में पेश बैंक के दस्तावेज संक्षिप्त विवरण थे। अदालत के आदेशानुसार भरण-पोषण की पूरी रकम अदा की गई है। लिहाजा, यह कार्यवाही अवैधानिक और अव्यावहारिक है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में याची की ओर से पेश बैंक खाते का ब्योरा और विवेचक की ओर से पेश विवरणों की विस्तृत तुलना की। पाया कि याची के दस्तावेज में 18,000 से लेकर 200,000 रुपये तक की निकासी और जमा की विशिष्ट प्रविष्टियां कई बार गायब थीं। लिहाजा, कोर्ट ने माना कि याची का दस्तावेज अदालत की गुमराह करने वाला है।

विज्ञापन

यह है मामला

2007 में तलाक के बाद याची की पूर्व पत्नी ने नाबालिग बेटे के लिए भरण-पोषण का दावा परिवार न्यायालय में दाखिल किया। कोर्ट ने फरवरी 2019 में पति को आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट, एफडी, बॉन्ड और वेतन पर्ची सहित पूर्ण आर्थिक ब्योरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने 2011–2014 के आईसीआईसीआई बैंक खाते का जो ब्योरा पेश किया, वह न तो प्रमाणित था और न ही उस पर बैंक की मुहर या हस्ताक्षर थे। विवेचना में पता चला कि अदालत में दाखिल दस्तावेज से कई एंट्री जानबूझकर हटाई गई थीं, ताकि वास्तविक आय छिपाई जा सके। इस आधार पर याची के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और विवेचना के बाद पुलिस ने सितंबर 2019 में आरोप पत्र दाखिल किया था। इस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए याची के खिलाफ समन आदेश जारी किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed