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High Court : प्रतिबंधित क्षेत्र में नमाज पढ़ने की नहीं दी जा सकती अनुमति, प्रशासन के प्रतिबंधों पालन सबकी जिम्
Fri, 20 Feb 2026 08:24 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 20 Feb 2026 08:24 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को सर्वोपरि बता कहा कि स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी प्रतिबंधों और निर्देशों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को सर्वोपरि बता कहा कि स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी प्रतिबंधों और निर्देशों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। किसी को भी प्रतिबंधित क्षेत्र में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने प्रतिबंधित स्थान पर नमाज पढ़ने के आरोपी युवकों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने अजीम अहमद खान उर्फ अबीम अहमद और मिर्जा इल्तिफातुर रहमान बेग उर्फ इल्तिफातुर रहमान की ओर से ट्रायल कोर्ट में चल रहे मुकदमे को रद्द करने की अर्जी पर दिया है। पीठ ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म और आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता है। लेकिन, यह स्वतंत्रता कानून और प्रशासनिक दिशानिर्देशों के दायरे में ही होनी चाहिए।
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संतकबीर नगर के खलीलाबाद थाने में युवकों के एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) अदालत ने मई 2019 में संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था। आरोपी युवकों ने मुकदमे की कार्रवाई रद्द करने की मांग कर हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। आरोप केवल प्रतिबंधित क्षेत्र में नमाज पढ़ने तक सीमित हैं। एक आरोपी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। ऐसे में मुकदमे का असर उसके भविष्य पर पड़ सकता है।
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