फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court Order If educational evidence is present then there is no need for bone examination

हाईकोर्ट ने कहा : शैक्षिक प्रमाण मौजूद तो अस्थि जांच की जरूरत नहीं, कोर्ट ने खारिज की मांग

Sun, 03 Dec 2023 06:04 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 03 Dec 2023 06:04 AM IST
सार

यह फैसला न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की अदालत ने याची की ओर से अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी को निचली अदालत द्वारा किशोर घोषित किए जाने वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुनाया।

विज्ञापन
High Court Order If educational evidence is present then there is no need for bone examination
अदालत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किशोर घोषित अपचारी के आयु निर्धारण के लिए अस्थि जांच कराने की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा शैक्षिक प्रमाण पत्र की उपलब्ध है तो आयु निर्धारण के लिए न अस्थि जांच की जरूरत है और न इसका आदेश दिया जा सकता है।

विज्ञापन

यह फैसला न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की अदालत ने याची की ओर से अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी को निचली अदालत द्वारा किशोर घोषित किए जाने वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए सुनाया।

विज्ञापन

मामला सहारनपुर के थाना क्षेत्र रामपुर मनिहारन का है। दो जनवरी को याची ने बाल अपचारी के खिलाफ अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की एफआईआर दर्ज करवाई थी। बताया कि आरोपी उसकी बेटी को बहला फुसला कर भागा ले गया और बाद दो दिन बाद उसे वापस घर छोड़ गया। घर लौटी बेटी डरी सहमी थी।विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पोक्सो अधिनियम की धाराओं की बढ़ा दी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन


आरोपी के पिता की ओर से सहारनपुर के विशेष न्यायधीश को अदालत में हाईस्कूल का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हुए उसे किशोर घोषित करने की मांग की गई। दावा किया गया कि कथित घटना की तारीख को आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम थी। अदालत ने आरोपी के हाईस्कूल के प्रमाणपत्र कम अंकित जन्मतिथि के आधार पर उसे किशोर घोषित कर दिया।

निचली अदालत द्वारा आरोपी को किशोर घोषित करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए याची ने कहा कि आरोपी की जन्मतिथि शैक्षिक प्रमाणपत्र के कम कर लिखाई गई है। वास्तव में वह बालिग है। अस्थि जांच करवा कर आरोपी की वास्तविक आयु का पता लगाया जाना जरूरी है।
 

कोर्ट ने आयु निर्धारण के लिए बाल अपचारी के अस्थि जांच की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 का हवाला देते हुए कहा कि शैक्षिक प्रमाणपत्र मौजूद है तो आयु निर्धारण के लिए उसे ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में न अस्थि जांच की जरूरत है और न जांच का आदेश दिया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed