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High Court : साइबर जांच के नाम पर केवल संदिग्ध राशि ही होगी होल्ड, बाकी पैसों का कर सकेंगे इस्तेमाल
Fri, 10 Apr 2026 02:27 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 10 Apr 2026 02:27 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि अब पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी संदिग्ध लेनदेन के आधार पर किसी व्यक्ति का पूरा बैंक खाता फ्रीज नहीं करा सकेगी।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि अब पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी संदिग्ध लेनदेन के आधार पर किसी व्यक्ति का पूरा बैंक खाता फ्रीज नहीं करा सकेगी। जांच के दौरान केवल उसी विशिष्ट राशि पर लियन (रोक) लगाई जाएगी, जिसके अपराध से जुड़े होने का पुख्ता संदेह हो। शेष वैध राशि का खाताधारक उपयोग कर सकेगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कानपुर नगर निवासी आशीष रावत बनाम भारत संघ और अन्य सहित कई समान याचिकाओं पर दिया। याचियों के अधिवक्ताओं शमशुल इस्लाम, आकाश कुमार शर्मा, अश्वनी कुमार ने दलील दी कि बिना सूचना व एफआईआर के उनके पूरे खातों को अनिश्चितकाल के लिए फ्रीज कर दिया है। यह याचियों के आजीविका व वित्तीय अधिकारों का उल्लंघन है।
कोर्ट ने पाया कि बीएनएसएस की धारा-106 (कुर्की) के प्रावधानों का अक्सर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को अपनी ही गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल करने से वंचित होना पड़ता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित बैंक इस फैसले की प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर उन सभी खातों के परिचालन को बहाल करेंगे, जो इन याचिकाओं का विषय है। बैंक केवल उसी राशि को फ्रीज रखेंगे, जिसका विवरण जांच अधिकारी ने लिखित में दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस जब भी धारा-106 के तहत किसी बैंक को निर्देश जारी करेगी तो उसे स्पष्ट रूप से उस संदिग्ध राशि का उल्लेख करना होगा, जो किसी अपराध से जुड़ी है। साथ ही खाता फ्रीज करने पर खाताधारक को इसकी सूचना दी जाएगी। साथ ही खाताधारक फ्रीज किए जाने को संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष डीफ्रीज करने की गुहार लगा सकेगा। इसी के साथ कोर्ट ने कई याचिकाओं को इन निर्देशों के साथ स्वीकार कर लिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार, न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कानपुर नगर निवासी आशीष रावत बनाम भारत संघ और अन्य सहित कई समान याचिकाओं पर दिया। याचियों के अधिवक्ताओं शमशुल इस्लाम, आकाश कुमार शर्मा, अश्वनी कुमार ने दलील दी कि बिना सूचना व एफआईआर के उनके पूरे खातों को अनिश्चितकाल के लिए फ्रीज कर दिया है। यह याचियों के आजीविका व वित्तीय अधिकारों का उल्लंघन है।
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कोर्ट ने पाया कि बीएनएसएस की धारा-106 (कुर्की) के प्रावधानों का अक्सर गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को अपनी ही गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल करने से वंचित होना पड़ता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित बैंक इस फैसले की प्रति प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर उन सभी खातों के परिचालन को बहाल करेंगे, जो इन याचिकाओं का विषय है। बैंक केवल उसी राशि को फ्रीज रखेंगे, जिसका विवरण जांच अधिकारी ने लिखित में दिया है।
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कोर्ट ने कहा कि पुलिस जब भी धारा-106 के तहत किसी बैंक को निर्देश जारी करेगी तो उसे स्पष्ट रूप से उस संदिग्ध राशि का उल्लेख करना होगा, जो किसी अपराध से जुड़ी है। साथ ही खाता फ्रीज करने पर खाताधारक को इसकी सूचना दी जाएगी। साथ ही खाताधारक फ्रीज किए जाने को संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष डीफ्रीज करने की गुहार लगा सकेगा। इसी के साथ कोर्ट ने कई याचिकाओं को इन निर्देशों के साथ स्वीकार कर लिया है।