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High Court : किशोरों से जुड़े मामलों में जेजे एक्ट ही प्रभावी, सामान्य कानून नहीं
Sat, 16 May 2026 04:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 16 May 2026 04:38 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किशोरों से जुड़े मामलों में किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम-2015 की व्यवस्था सर्वोपरि होगी। पुलिस सामान्य आपराधिक प्रक्रिया नहीं अपना सकती।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किशोरों से जुड़े मामलों में किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम-2015 की व्यवस्था सर्वोपरि होगी। पुलिस सामान्य आपराधिक प्रक्रिया नहीं अपना सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि घटना के समय आरोपी की उम्र 18 वर्ष से कम है तो उसके खिलाफ सीधे नियमित एफआईआर दर्ज करना कानून सम्मत नहीं माना जाएगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने औरैया के दो किशोरों की याचिका पर दिया। दोनों पर मारपीट और धन मांगने का आरोप था। जांच में उनकी उम्र नाबालिग पाई गई। इसके बावजूद पुलिस ने सामान्य एफआईआर दर्जकर चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
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याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि जेजे मॉडल रूल्स-2016 के अनुसार जघन्य अपराधों को छोड़ अन्य मामलों में किशोरों के खिलाफ केवल सूचना दर्ज कर सामाजिक पृष्ठभूमि रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि विशेष कानून होने के कारण जेजे एक्ट को दंड प्रक्रिया संहिता पर प्राथमिकता मिलेगी। कोर्ट ने चार्जशीट, संज्ञान आदेश, समन और किशोर न्याय बोर्ड में लंबित कार्यवाही रद्द कर दी।
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