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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: No action can be taken against a retired employee without the permission of the Governor.

High Court : राज्यपाल की अनुमति के बगैर सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ नहीं हो सकती कार्यवाही

Wed, 25 Feb 2026 04:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 25 Feb 2026 04:32 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिड-डे मील घोटाले के आरोपी एक सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को रद्द कर दिया। कहा, राज्यपाल की अनुमति के बिना किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकती।

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High Court: No action can be taken against a retired employee without the permission of the Governor.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिड-डे मील घोटाले के आरोपी एक सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य के खिलाफ जारी वसूली आदेश को रद्द कर दिया। कहा, राज्यपाल की अनुमति के बिना किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकती। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने बागपत के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त कौशिक से 11.14 लाख की रिकवरी के आदेश को रद्द कर दिया।

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मामला बागपत के सर्वोदय मंदिर इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुरेंद्र दत्त कौशिक से जुड़ा है। उन पर आरोप था कि कोरोनाकाल (2019-2022) के दौरान उन्होंने मिड-डे मील योजना के तहत खाद्य सुरक्षा भत्ते और खाद्यान्न में करीब 11 लाख रुपये का गबन किया। विभाग ने एक आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर उनकी पेंशन से इस राशि की वसूली का आदेश जारी किया था।
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इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रधानाचार्य 2021 में सेवानिवत्त हो चुके हैं। सिविल सेवा नियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत सेवानिवृत्त के बाद किसी भी कार्रवाई के लिए राज्यपाल की मंजूरी जरूरी है। विभाग ने सरकार के एक विशेष सचिव के पत्र को ही मंजूरी मान लिया और बिना कोई नई चार्जशीट दिए पुरानी रिपोर्ट के आधार पर रिकवरी शुरू कर दी। कोर्ट ने वसूली आदेश को रद्द कर कहा कि पिछली आंतरिक जांच केवल एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट थी। उसे पूर्ण अनुशासनात्मक जांच नहीं माना जा सकता।

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