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विश्वसनीय मृत्यु पूर्व बयान सजा के लिए पर्याप्त आधार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Sun, 14 Jun 2020 01:20 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 14 Jun 2020 01:20 AM IST
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high court news:credible prenatal statement conviction basis
court order - फोटो : court order

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि मृत्यु पूर्व दिया गया बयान (डाइंग डिक्लरेशन) सभी मानकों पर विश्वसनीय साबित होता है तो वह सजा देने के लिए पर्याप्त आधार होगा। कोर्ट ने कहा कि यह संदेह से परे साबित होना जरूरी है कि मृत्यु पूर्व बयान सही मानसिक स्थिति में बिना किसी दबाव या प्रभाव में आए निर्धारित नियमों के तहत दिया गया है।

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कोर्ट ने कानपुर नगर के नवाबगंज थाना क्षेत्र में अपने भाई की पत्नी को जलाकर मार देने की घटना में अभियुक्तों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए यह आदेश दिया। अभियुक्तों ने सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। अपील पर न्यायमूर्ति प्रीतांकर दिवाकर और न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने सुनवाई की। 
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घटना 24 मार्च 2019 की है। कानपुर के नवाबगंज में रहने वाले कृपाशंकर गुप्ता और शंकर गुप्ता का परिवार एक ही मकान के दो अलग-अलग हिस्सों में रहता था। घटना वाली रात करीब साढ़े 9 बजे कृपा शंकर गुप्ता की पत्नी रिंकी को शंकर गुप्ता की पत्नी मुन्नी देवी, बेटी मोहिनी और बेटे आशीष उर्फ भुव ने मिट्टी का तेल डालकर जला दिया।
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उसे बचाने में कृपाशंकर के हाथ भी झुलस गए। उसने तीनों अभियुक्तों की खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिंकी गुप्ता को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। मरने से पहले उसने अपने पति और फिर विवेचक तथा अंत में मजिस्ट्रेट को दिए बयान में तीनों अभियुक्तों द्वारा जलाने की बात बताई थी। 


बचाव पक्ष की ओर से मृत्यु पूर्व बयान को संदिग्ध बताया गया। कहा गया कि रिंकी गंभीर रूप से जली थी वह इस स्थिति में नहीं थी बयान दे सके। कोर्ट ने पाया कि रिंकी का मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान होने से पूर्व सरकारी डाक्टर ने उसकी मानसिक स्थिति सही होने और बयान देने योग्य होने की पुष्टि की थी। मृतका द्वारा झूठा बयान दिए जाने का कोई आधार साबित नहीं किया जा सका है, इसलिए बयान विश्वसनीय है।

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