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High Court : भरण-पोषण न्यायाधिकरण को संपत्ति के स्वामित्व अधिकारों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं

Thu, 24 Jul 2025 07:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 24 Jul 2025 07:28 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरणों को संपत्ति के स्वामित्व अधिकारों से संबंधित विवादों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।

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High Court: Maintenance Tribunal has no right to decide on ownership rights of property
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरणों को संपत्ति के स्वामित्व अधिकारों से संबंधित विवादों पर निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने यह टिप्पणी करते हुए एक वरिष्ठ नागरिक की याचिका खारिज कर दी जिसने अपनी संपत्ति पर गेट के निर्माण में पड़ोसी की ओर से कथित बाधा और धमकी के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने रामपुर निवासी इशाक की याचिका पर दी।

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याची ने उप्र भरण-पोषण और कल्याण नियमावली, 2014 व उप्र भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 के तहत अपने जीवन और संपत्ति की सुरक्षा की मांग की थी। याची का तर्क था कि ये प्रावधान वरिष्ठ नागरिकों को बच्चों और रिश्तेदारों के साथ-साथ किसी भी ऐसे व्यक्ति से भी सहायता प्रदान करते हैं जो उन्हें परेशान करता है।
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न्यायालय ने दलीलों को सुनने के बाद कहा कि माता-पिता के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 का उद्देश्य बुजुर्गों को होने वाली भावनात्मक उपेक्षा और शारीरिक तथा वित्तीय सहायता की कमी को दूर करना है। अधिनियम मुख्य रूप से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए है। इस अधिनियम के तहत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरणों को संपत्ति और स्वामित्व अधिकारों से संबंधित मामलों में निर्णय करने का अधिकार नहीं दिया गया है। ऐसे विवादों को सक्षम क्षेत्राधिकार के सिविल न्यायालयों के समक्ष हल किया जाना चाहिए। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी गई।

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