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हाईकोर्ट : हत्या के आरोपित की आजीवन कारावास की सजा बरकरार
Fri, 21 Jan 2022 11:54 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 21 Jan 2022 11:54 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि घटना में याचियों के मृतक को घर से ले जाने के स्पष्ट प्रमाण हैं और डेढ़ घंटे के भीतर केवल कुछ सौ मीटर की दूरी पर मौत की घटना कारित हुई। अपीलकर्ताओं की ओर से घटना से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं है जिनके कारण सुरेश उर्फ संजू की मृत्यु हुई।
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Allahabad High Court
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के आरोपित की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार है। इसके साथ ही उसने निचली अदालत केफैसले को भी बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि याचीअपनी बेगुनाही साबित करने में नाकाम रहा। यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने याची दिनेश सहित दो याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि घटना में याचियों के मृतक को घर से ले जाने के स्पष्ट प्रमाण हैं और डेढ़ घंटे के भीतर केवल कुछ सौ मीटर की दूरी पर मौत की घटना कारित हुई। अपीलकर्ताओं की ओर से घटना से जुड़ी परिस्थितियों के संबंध में कोई स्पष्टीकरण नहीं है जिनके कारण सुरेश उर्फ संजू की मृत्यु हुई।
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मामले में याची के खिलाफ दिनांक 12 मार्च 2005 को जिला अलीगढ़ के क्वार्सी थाने में युवक की हत्या के मामले में आईपीसी की धारा 302 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। याची पर आरोप है कि वह नारायण सिंह के पुत्र सुरेश उर्फ संजू को उसके घर से ले जाकर कुछ दूरी पर मौत के घाट उतार दिया।
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घटना के बाद याची अकेले घर लौट गया तो नारायण सिंह ने उससे अपने बेटे के बारे में पूछा। याची ने कोई संतुष्टपूर्वक जवाब नहीं दिया। मामले में अलीगढ़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने सुनवाई करते हुए याची को 10 हजार रुपये के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। याची ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत केफैसले को बरकरार रखा है।