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High Court : किशोर को जेल में नहीं रख सकते जब तक वह 21 साल का न हो जाए, रिहा करने का आदेश
Sat, 27 Sep 2025 05:55 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 27 Sep 2025 05:55 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध के आरोपी किशोर को तब तक जेल में नहीं रखा जा सकता जब तक कि वह 21 वर्ष का न हो जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत एक बार किशोर होने का दावा उठने के बाद जेल में हिरासत अवैध होगी।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अपराध के आरोपी किशोर को तब तक जेल में नहीं रखा जा सकता जब तक कि वह 21 वर्ष का न हो जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत एक बार किशोर होने का दावा उठने के बाद जेल में हिरासत अवैध होगी। ऐसे में उसे बाल संरक्षण गृह में रखा जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति संदीप जैन की खंडपीठ ने किशोर पवन कुमार की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया।
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थरवाई थाना क्षेत्र में हत्या के मामले में आरोपी याची ने ट्रायल के लिए आरोप तय होने के बाद किशोरावस्था का दावा किया था। इस दौरान कोर्ट ने पाया कि अपराध के समय उसकी आयु 14 साल तीन माह 19 दिन थी। किशोर न्याय बोर्ड की ओर से किशोर घोषित किए जाने के बावजूद रिहाई न होने पर किशोर की ओर से अधिवक्ता ने याचिका दायर की।
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कोर्ट ने कहा कि जब आपराधिक न्यायालय में किशोर के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता तो बंदी के लिए जमानत अर्जी देने का क्या औचित्य है। कोर्ट ने जेल अधीक्षक नैनी प्रयागराज को याची को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। साथ ही पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को याची को ट्रायल कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया ताकि अदालत अपराध के समय उसकी आयु का निर्धारण कर सके। तब तक याची को अभिरक्षा में रखा जाएगा।
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