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हाईकोर्ट : बर्खास्त रोडवेज चालक को 40 फीसदी पूर्ववेतनमान देने के निर्देश

Sat, 26 Feb 2022 09:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 26 Feb 2022 09:07 PM IST
सार

मामले में याची (चालक) पर आरोप था कि खुर्जा से अलीगढ़ जाते समय बस में 21 यात्री सवार थे, लेकिन किसी केपास टिकट नहीं था। 15 यात्रियों का ब्योरा नहीं था। याची और परिचालक दिनेश कुमार ने यात्रियों को भड़काकर जांच में बांधा उत्पन की।

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High Court: Instructions to give 40 percent pre-pay scale to the dismissed roadways driver
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के प्रबंध निदेशक (एमडी) को 1991 में बर्खास्त किए गए चालक को राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि बर्खास्त चालक को 40 फीसदी पूर्व वेतनमान का भुगतान किया जाए।

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साथ ही उसकी बर्खास्तगी के समय जो भी बकाया हो, उसे बिना किसी कटौती के भुगतान किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने लाहिरी सिंह (चालक) की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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मामले में याची (चालक) पर आरोप था कि खुर्जा से अलीगढ़ जाते समय बस में 21 यात्री सवार थे, लेकिन किसी केपास टिकट नहीं था। 15 यात्रियों का ब्योरा नहीं था। याची और परिचालक दिनेश कुमार ने यात्रियों को भड़काकर जांच में बांधा उत्पन की। इसके अलावा बिल भर भी हस्ताक्षर नहीं किए। जिसकी वजह से निरीक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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बस को भी निर्धारित गंतव्य तक नहीं ले जाया गया। मामले में निगम ने आंतरिक जांच कराई तो आरोप सही पाया गया और चालक को 1991 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। मामले में श्रम न्यायालय ने विभागीय जांच को सही मानते हुए याची को कोई राहत नहीं दी। इस पर याची ने हाईकोर्ट केसमक्ष आवेदन किया।




हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बिना टिकट यात्रियों को ले जाने के मामले में कदाचार का दोषी माना, लेकिन बाकी अन्य मामलों में बेकसूर करार देते हुए 40 फीसदी पूर्ववेतनमान देने का आदेश दिया। कोर्ट ने यूपीएसआरटीसी के एमडी को निर्देशित किया कि वह उक्त लाभ याची या उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को चार महीने के भीतर प्रदान कर देें।

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