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हाईकोर्ट : प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी न करने का निर्देश
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प्रिंटेड प्रोफार्मा पर समन जारी न करने का निर्देश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामलों में निचली अदालतों द्वारा प्रिंटेड प्रोफार्मा में समन जारी न किए जाएं। हाईकोर्ट ने अपने महानिबंधक को प्रदेश के सभी जिला न्यायाधीशों को इस आशय का एक सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक केस में आरोपी को समन जारी करना गंभीर मामला है। प्रिंटेड प्रोफार्मा में खाली स्थान भरकर समन जारी करना स्थापित न्यायिक मानदंडों के प्रतिकूल है। यह आदेश न्यायमूर्ति बृजराज सिंह ने राबर्ट्सगंज के सोहन मिश्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा कि आदेश से स्पष्ट झलकना चाहिए कि पारित करते समय न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा मैकेनिकल मैनर में सम्मन जारी करना आपत्तिजनक और निंदनीय है। मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए बगैर जारी आदेश न्यायिक प्रक्रिया की हत्या है। कोर्ट ने सीजेएम सोनभद्र के समन आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही नए सिरे से दो महीने में नियमानुसार कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। याचिका में सीजेएम सोनभद्र के 16 दिसंबर 2021 को जारी समन की वैधता को चुनौती दी गई थी। याची के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। याची का कहना था कि उसे झूठा फंसाया गया है। ब्यूरो
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक मामलों में निचली अदालतों द्वारा प्रिंटेड प्रोफार्मा में समन जारी न किए जाएं। हाईकोर्ट ने अपने महानिबंधक को प्रदेश के सभी जिला न्यायाधीशों को इस आशय का एक सर्कुलर जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आपराधिक केस में आरोपी को समन जारी करना गंभीर मामला है। प्रिंटेड प्रोफार्मा में खाली स्थान भरकर समन जारी करना स्थापित न्यायिक मानदंडों के प्रतिकूल है। यह आदेश न्यायमूर्ति बृजराज सिंह ने राबर्ट्सगंज के सोहन मिश्र की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा कि आदेश से स्पष्ट झलकना चाहिए कि पारित करते समय न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा मैकेनिकल मैनर में सम्मन जारी करना आपत्तिजनक और निंदनीय है। मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए बगैर जारी आदेश न्यायिक प्रक्रिया की हत्या है। कोर्ट ने सीजेएम सोनभद्र के समन आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही नए सिरे से दो महीने में नियमानुसार कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। याचिका में सीजेएम सोनभद्र के 16 दिसंबर 2021 को जारी समन की वैधता को चुनौती दी गई थी। याची के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई थी। याची का कहना था कि उसे झूठा फंसाया गया है। ब्यूरो
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