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आदेश : जवाब दाखिल करने में देरी पर हाईकोर्ट ने लगाया पांच हजार रुपये का जुर्माना
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जवाब दाखिल करने में देरी पर हाईकोर्ट
ने लगाया पांच हजार रुपये का हर्जाना
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयकर विभाग के अधिकारियों सहित केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने पांच हजार रुपये हर्जाना जमा करने की शर्त पर संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल करने का तीन दिन का समय दिया है। हर्जाना राशि हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा होगी। याचिका की सुनवाई 26 अप्रैल मंगलवार को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने मेसर्स यूपी पाइप फिटिंग सप्लायर की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल का कहना था कि दो भागीदारों की फर्म थी। एक की मौत होने के कारण भागीदारी भंग हो गई। याची ने जीएसटी एक्ट के तहत पंजीकरण की अर्जी दी। अधीनस्थ अधिकारियों ने पत्रावली चेन्नई स्थित केंद्रीय जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करने के लिए अग्रसारित की है। पंजीकरण न होने के कारण याची अपना व्यवसाय नहीं कर पा रहा है।
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने 28 मार्च को दो हफ्ते में जवाब मांगा और कहा कि वैधानिक उपबंधों के बावजूद अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। जवाब नहीं दिया तो हर्जाना लगाया जाएगा। इसके बाद 12 अप्रैल को जीएसटी काउंसिल को पक्षकार बनाते हुए सभी विपक्षियों को एक हफ्ते में संक्षिप्त जवाब दाखिल करने का समय दिया। इसके बावजूद जवाब नहीं दाखिल किया गया तो कोर्ट ने पांच हजार रुपये हर्जाना के साथ तीन दिन में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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ने लगाया पांच हजार रुपये का हर्जाना
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयकर विभाग के अधिकारियों सहित केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जवाब दाखिल करने के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने पांच हजार रुपये हर्जाना जमा करने की शर्त पर संक्षिप्त जवाबी हलफनामा दाखिल करने का तीन दिन का समय दिया है। हर्जाना राशि हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति में जमा होगी। याचिका की सुनवाई 26 अप्रैल मंगलवार को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने मेसर्स यूपी पाइप फिटिंग सप्लायर की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल का कहना था कि दो भागीदारों की फर्म थी। एक की मौत होने के कारण भागीदारी भंग हो गई। याची ने जीएसटी एक्ट के तहत पंजीकरण की अर्जी दी। अधीनस्थ अधिकारियों ने पत्रावली चेन्नई स्थित केंद्रीय जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करने के लिए अग्रसारित की है। पंजीकरण न होने के कारण याची अपना व्यवसाय नहीं कर पा रहा है।
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इस याचिका पर हाईकोर्ट ने 28 मार्च को दो हफ्ते में जवाब मांगा और कहा कि वैधानिक उपबंधों के बावजूद अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। जवाब नहीं दिया तो हर्जाना लगाया जाएगा। इसके बाद 12 अप्रैल को जीएसटी काउंसिल को पक्षकार बनाते हुए सभी विपक्षियों को एक हफ्ते में संक्षिप्त जवाब दाखिल करने का समय दिया। इसके बावजूद जवाब नहीं दाखिल किया गया तो कोर्ट ने पांच हजार रुपये हर्जाना के साथ तीन दिन में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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