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UP : हाईकोर्ट का अहम फैसला- जाली दस्तावेज पर पाई गई नौकरी कई साल की सेवा के बाद भी शून्य मानी जाएगी
Wed, 19 Nov 2025 03:46 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 19 Nov 2025 03:46 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जाली दस्तावेज के आधार पर मिली नौकरी कई साल की सेवा के बाद भी शून्य मानी जाएगी। धोखाधड़ी हर गंभीर कार्य को दूषित कर देती है और गलत तरीके से प्राप्त नियुक्ति को लंबी सेवा भी वैध नहीं बना सकती।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जाली दस्तावेज के आधार पर मिली नौकरी कई साल की सेवा के बाद भी शून्य मानी जाएगी। धोखाधड़ी हर गंभीर कार्य को दूषित कर देती है और गलत तरीके से प्राप्त नियुक्ति को लंबी सेवा भी वैध नहीं बना सकती। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दीपा मैगलीना की जाली दस्तावेज के आधार पर निलंबन और वेतन रोकने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। मुरादाबाद के सेंट जोसेफ गर्ल्स जूनियर हाईस्कूल में दीपा की 1991 में नियुक्ति हुई थी। स्कूल को 2015 में अनुदान प्राप्त स्कूलों की सूची में शामिल कर दिया गया। इसके बाद याची सहायक अध्यापिका के पद पर नियुक्ति प्राप्त की।
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इस दौरान एक शिकायत पर जांच की गई और फजी टीईटी प्रमाणपत्र पाए जाने के आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया और वेतन रोक दिया। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि उनकी नियुक्ति 1991 में हुई थी। 2015 में अनुदान सूची में शामिल होने के बाद उनकी नियुक्ति को नियमित किया गया था। यह एक अल्पसंख्यक संस्थान है। इसलिए उन्हें टीईटी की आवश्यकता से छूट प्राप्त है।
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राज्य के वकीलों ने दलील दी कि याची ने 2015 के विज्ञापन के तहत आवेदन किया था, जिसमें टीईटी योग्यता अनिवार्य थी। नियुक्ति के समय याची ने जो टीईटी प्रमाण पत्र जमा किया था, उसमें उसने 91 अंक बताए थे। बोर्ड से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट के अनुसार याची ने केवल 63 अंक प्राप्त किए थे। इस प्रकार याची ने जाली प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के आधार पर प्राप्त नियुक्ति को किसी भी बहाने से उचित या माफ नहीं किया जा सकता है।
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