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High Court : नियमितिकरण में देरी के लिए कर्मचारी नहीं, सरकार दोषी, सेवा लाभों से नहीं किया जा सकता वंचित

Thu, 22 May 2025 05:01 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 22 May 2025 05:01 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियमितिकरण में देरी के लिए लिए कर्मचारी को न दोषी ठहराया जा सकता ह और न ही किसी सेवा लाभाें से वचिंत किया जा सकता है। 2005 को नियमितिकरण की योग्यता हासिल करने वाले कर्मचारी पुरानी पेंशन के हकदार हैं।

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High Court Government, not the employee, is to be blamed for delay in regularization
अदालत - फोटो : ANI

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियमितिकरण में देरी के लिए लिए कर्मचारी को न दोषी ठहराया जा सकता है और न ही किसी सेवा लाभाें से वंचित किया जा सकता है। 2005 को नियमितिकरण की योग्यता हासिल करने वाले कर्मचारी पुरानी पेंशन के हकदार हैं। भले ही सरकार ने उन्हें निर्धारित तिथि के बाद नियमित किया हो। क्योंकि, नियमितिकरण में देरी के लिए सरकार दोषी है।

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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की अदालत ने राज्य सरकार के दावे को खारिज करते हुए अपील निस्तारित कर दी। राज्य सरकार ने प्रयागराज नगर निगम में तैनात रहे अवर अभियंता चंद्र मोहन यादव, विनय कुमार सक्सेना, सुरेश चंद्र लवाणिया और कृष्ण मोहन माथुर के पक्ष में पारित एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी। इसमें अदालत ने सभी सेवानिवृत्ति याचियों को उनकी नियुक्ति की तिथि से पुरानी पेंशन योजना का हकदार माना था।

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हालांकि, खंडपीठ ने कर्मचारियों को नियमितिकरण की योग्यता हासिल करने की तिथि से पुरानी पेंशन का हकदार माना है।कर्मचारियाें की दलील थी कि वे 1987 में संविदा या अस्थायी आधार पर नियुक्त हुए थे। 1995 में उन्हें शासनादेश के आधार पर अस्थायी नियुक्ति दी गई थी। सेवा में तीन साल पूरे करने और आवश्यक शैक्षणिक योग्यता रखने के बावजूद उन्हें 2008 में नियमित किया गया। ऐसे में उन्हें नई पेंशन योजना के अधीन कर दिया गया। जबकि, उन्हें उनकी मौलिक नियुक्ति की तारीख से पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की दलील

सरकार ने दलील दी कि इन कर्मियों का नियमितीकरण एक अप्रैल 2005 के बाद हुआ था। ऐसे में ये कर्मचारी पुरानी पेंशन के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा कि नियमानुसार 10 अप्रैल 2003 से पहले याचियों कर्मचारियों की नियमितीकरण की पात्रता बन चुकी थी। राज्य की लापरवाही या विलंब का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगतेंगे।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की सेवा को 10 अप्रैल 2003 से नियमित मानते हुए उनकी पेंशन की पुनः गणना की जाए। जो कर्मचारी पहले से प्राप्त कर रहे हैं, उनकी पेंशन पुनः निर्धारित होगी, लेकिन उनसे कोई वसूली नहीं की जाएगी। यह प्रक्रिया आदेश की प्रति प्रस्तुत करने के तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है।

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