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हाईकोर्ट : दोस्त और उसकी मां पर दहेज उत्पीड़न का आरोप, पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक

Sun, 06 Feb 2022 01:22 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 06 Feb 2022 01:22 AM IST
सार

मामले में याची और उसकी मां के खिलाफ याची के दोस्त की पत्नी ने कानपुर देहात के भोगनीपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले में पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया है।

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High Court: Friend and his mother accused of dowry harassment, ban on punitive action of police
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

कानपुर देहात के निवासी शुभम तिवारी उर्फ शुभेंदु की ओर से आरोप पत्र को खारिज करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिलहाल पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले में राज्य सरकार से 10 दिनों में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। यह आदेश विपिन चंद्र दीक्षित ने शुभम तिवारी उर्फ शुभेंदु की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

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मामले में याची और उसकी मां के खिलाफ याची के दोस्त की पत्नी ने कानपुर देहात के भोगनीपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले में पुलिस ने विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया है। याची ने इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में गुहार लगाई है और आरोप रद्द करने की मांग की है। याची की ओर से कोर्ट के सामने तर्क प्रस्तुत किया गया कि वह निर्दोष है। उसे मामले में झूठा फंसाया गया है।
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विरोधी पक्ष का उसके पति से वैवाहिक विवाद है। याची पति का मित्र है। मामले में उसे और उसकी मां को जानबूझकर फंसाया गया है। एफआईआर के अवलोकन से साफ है कि याची के खिलाफ  धारा 498ए के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम के तहत कोई अपराध नहीं बनता है और केवल दोस्त होने के नाते याची और उसकी मां को फंसाया गया है।
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मामले में उचित जांच किए बिना जांच अधिकारी ने आरोप पत्र प्रस्तुत किया है। आवेदक को समन आदेश देकर बुलाया गया है। कोर्ट ने इस पर सरकार से 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कहा कि पुलिस याची के खिलाफ मामले में अगली तिथि की सुनवाई तक कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

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