High Court : किसान का 50 हजार का कर्ज 3.5 लाख हुआ, कोर्ट ने कहा- मूलधन के दोगुने से ज्यादा वसूली न करे बैंक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की ओर से किसान को दिए गए 50 हजार रुपये के कर्ज के ब्याज समेत करीब 3.5 लाख रुपये होने पर गंभीर चिंता जताई है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की ओर से किसान को दिए गए 50 हजार रुपये के कर्ज के ब्याज समेत करीब 3.5 लाख रुपये होने पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि सहकारी बैंक किसानों को साहूकारों के शोषण से बचाने के लिए बने थे। परंतु वे खुद किसानों पर असहनीय आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। कोर्ट ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि समिति की रिपोर्ट आने तक बैंक किसी भी कर्जदार से मूलधन के दोगुनी राशि से अधिक वसूली नहीं करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने बैजनाथ व संबद्ध 15 अन्य की याचिका पर दिया है। महोबा के कुलपहाड़ क्षेत्र निवासी किसान बैजनाथ ने वर्ष 2009 में दो भैंस खरीदने के लिए बैंक से 50 हजार रुपये का ऋण लिया था। ऋण पर 13 प्रतिशत वार्षिक ब्याज तय था।
इसके लिए किसान ने अपनी जमीन बैंक के पास गिरवी रखी थी। शुरुआती कुछ किस्त अदा करने के बाद वह किन्हीं कारणों से पैसे जमा नहीं कर सका। समय पर ऋण की अदायगी न होने पर बकाया राशि बढ़कर 3,49,862 रुपये हो गई। बैंक ने ऋण वसूली के लिए गिरवी रखी जमीन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसके खिलाफ किसान ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सहकारी बैंकिंग व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति ब्याज दर, ऋण वसूली, किसानों की ऋण क्षमता, भूमि रिकॉर्ड, डिजिटलाइजेशन और बैंकिंग व्यवस्था की खामियों की समीक्षा करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक बैंक मूलधन की दोगुनी राशि से अधिक वसूली नहीं कर सकेगा। कर्जदारों के किस्तों में भुगतान के अनुरोध पर बैंकों को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना होगा। मामले की अगली सुनवाई आठ सितंबर 2026 को होगी।
14 प्रतिशत तक ब्याज पर हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि सहकारी बैंक किसानों से लगभग 14 प्रतिशत तक वार्षिक ब्याज वसूल रहे हैं। जबकि राष्ट्रीयकृत बैंकों में तीन लाख रुपये तक किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण पर सात प्रतिशत ब्याज लिया जाता है। वहीं समय पर ऋण चुकाने पर चार प्रतिशत ही ब्याज लिया जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक छोटा कृषि ऋण कई गुना बढ़कर किसान की जमीन नीलामी की स्थिति पैदा कर दे तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
सहकारी बैंक में डिफॉल्टर हैं करीब 2.74 लाख कर्जदार
कोर्ट के समक्ष पेश आंकड़ों के अनुसार एक जुलाई 2025 तक बैंक के 2,74,166 कर्जदार डिफॉल्टर थे। इन पर मूलधन के रूप में 1,567.87 करोड़ रुपये बकाया था जबकि ब्याज सहित कुल बकाया राशि 7,061.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। 20 वर्ष से अधिक पुराने 24,150 ऋण खातों में मूलधन करीब 92.12 करोड़ रुपये था, जबकि ब्याज सहित कुल बकाया 857.56 करोड़ रुपये हो गया था।