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High Court : दुश्मनी दोधारी तलवार, झूठे भी फंसा दिए जाते हैं लोग, हत्या, डकैतीी मं उम्रकैद पाए आरोपियों की सज
Wed, 25 Feb 2026 06:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 25 Feb 2026 06:38 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के 40 साल पुरानी डकैती और हत्या में दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा रद्द कर दी। कहा, दुश्मनी दोधारी तलवार की तरह होती है। आपसी दुश्मनी केवल अपराध का कारण ही नहीं होती।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के 40 साल पुरानी डकैती और हत्या में दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा रद्द कर दी। कहा, दुश्मनी दोधारी तलवार की तरह होती है। आपसी दुश्मनी केवल अपराध का कारण ही नहीं होती, बल्कि यह किसी को झूठा फंसाने का आधार भी हो सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अमर सिंह व अन्य की ओर से सजा के खिलाफ दाखिल अपील स्वीकार कर ली। ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि आरोप संदेह से परे साबित न हों।
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मामल मथुरा के गोवर्धन थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के मुताबिक नवंबर 1985 में रात में अमर सिंह, प्रकाश, हरदयाल और अन्य ने बिजली की रोशनी में डकैती डाली और गोलीबारी की, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस आरोपियों के पास से लूटा गया एक भी जेवर या कीमती सामान बरामद नहीं कर सकी। मुख्य आरोपी हरदयाल और पीड़ित पक्ष के बीच पहले से जमीन (वसीयत) और एक महिला के भागने को लेकर गहरा विवाद चल रहा था। गवाहों का दावा है कि आरोपियों ने खुले चेहरे के साथ वारदात की।
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कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए अमर सिंह, प्रकाश, बहोरी और बीरी सिंह को बरी कर दिया। जबकि, मुख्य आरोपी हरदयाल की पहले ही मौत होने के क्रम उसका मामला पहले ही समाप्त हो गया था।
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कोर्ट ने उठाए सवाल
1.यह अविश्वसनीय है कि डकैत जानते हुए भी कि पीड़ित उन्हें पहचानते हैं, बिना चेहरा ढके और बिजली की रोशनी में वारदात को अंजाम देंगे।
2.घटना के समय बिजली की उपलब्धता साबित करने के लिए बिजली विभाग के किसी अधिकारी को गवाह नहीं बनाया गया।