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High Court : जेल में बंद कर्मचारी औपचारिक नहीं, वास्तविक सुनवाई के अवसर का हकदार

Thu, 29 May 2025 03:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 29 May 2025 03:56 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जेल में बंद कर्मचारी को विभागीय कार्यवाही में जवाब देने का औपचारिक नहीं, वास्तविक अवसर मिलना चाहिए। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने आगरा निवासी विनोद कुमार मिश्रा की बर्खास्तगी को अवैधानिक करार दिया है।

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High Court Employees in jail are entitled to a real hearing, not a formal one
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जेल में बंद कर्मचारी को विभागीय कार्यवाही में जवाब देने का औपचारिक नहीं, वास्तविक अवसर मिलना चाहिए। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की अदालत ने आगरा निवासी विनोद कुमार मिश्रा की बर्खास्तगी को अवैधानिक करार दिया है। साथ ही उसे सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि हिरासत में रहते किसी भी व्यक्ति के लिए विभागीय नोटिसों का जवाब देना या जांच में भाग लेना व्यावहारिक नहीं होता। भले ही उसके रिश्तेदारों को नोटिस दिया गया हो या अखबार में सूचना प्रकाशित की गई हो।
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क्या है मामला

विनोद कुमार मिश्रा आगरा जिला सहकारी बैंक लिमिटेड में क्लर्क-कम-कैशियर के पद पर कार्यरत थे। पांच सितंबर 2021 को कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने उन्हें एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार किया था। मुकदमा लंबा चला। 28 जून 2024 को उन्हें विशेष न्यायाधीश, कुल्लू की अदालत ने बरी कर दिया।
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इस दौरान बैंक ने उन्हें ‘अनधिकृत अनुपस्थिति’ का दोषी मानते हुए विभागीय जांच शुरू की और 28 दिसंबर 2023 को सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


याची की दलील

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कर्मचारी जेल में रहते हुए विभागीय जांच में शामिल नहीं हो सकता था। उसे कोई वास्तविक अवसर नहीं दिया गया।

कोर्ट की टिप्पणी

‘सुनवाई का अवसर’ केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि एक वास्तविक और सार्थक प्रक्रिया होनी चाहिए। विशेष रूप से जब कर्मचारी जेल में हो या स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अक्षम हो। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और व्यावहारिक दृष्टिकोण आवश्यक है, अन्यथा न्याय प्रक्रिया अन्यायपूर्ण बन सकती है।

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