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पुलिस थानों में महिला शौचालय बनाने का मामला, पुरानी योजना पेश करने से हाईकोर्ट असंतुष्ट

Wed, 17 Feb 2021 08:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 17 Feb 2021 08:52 PM IST
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High court dissatisfied with presenting old scheme in case of women toilets in police stations
court - फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज सहित प्रदेश के सभी थानों में महिला कर्मचारियों के शौचालय व अन्य मूलभूत सुविधाएं दिए जाने पर पुरानी योजना पेश करने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने असंतोष जताया है। अदालत का कहना था कि जो योजना बताई जा रही है वह दशकों से लंबित है। सरकार बताए कि महिलाकर्मियों को तत्काल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। सरकारी अधिवक्ता के समय मांगे जाने पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई 22 फरवरी नियत कर दी है। 
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विभिन्न लॉ कॉलेजों में पढ़ रहे विधि छात्र-छात्राओं अंजली पांडेय व 12 अन्य की याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि पुलिस थानों में महिला कर्मचारियों और आगंतुक महिलाओं के लिए शौचालय, स्नानगृह या उनके रहने की अलग से कोई सुविधा नहीं है। इससे महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सुविधाएं न देना महिलाओं की गरिमा और अनुच्छेद 21 में प्राप्त मौलिक अधिकारों के विपरीत है। इससे पूर्व कोर्ट ने राज्य सरकार से इस मामले में जवाब मांगा था। 
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स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार ने प्रदेश के 1425 पुलिस थानों में से 1317 थानों में महिला पुलिस के लिए हॉस्टल बनाने की योजना की मंजूरी दी है। इसमें चार महिलाओं पर एक शौचालय व स्नानगृह की व्यवस्था होगी। ।51 थानों में निर्माण जारी है। बजट स्वीकृत किया गया है। विजिटर रूम में भी मूलभूत सुविधाएं दी जाएंगी। योजना पूरी होते ही प्रदेश के सभी पुलिस थानों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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इस पर कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से योजना चल रही है। हर थाने में महिला शौचालय, वाशरूम की तत्काल जरूरत है। इस संबंध में कुछ नहीं बताया कि तत्काल के लिए क्या कदम उठाए हैं। इस पर सरकार की तरफ से समय मांगा गया। कोर्ट ने 22 फरवरी को पुलिस थाने में महिला शौचालय वाशरूम बनाने पर जानकारी मांगी है। कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मूलभूत सुविधाएं मानव जीवन की गरिमा से जुड़े हैं। इनको उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
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