{"_id":"61587c688ebc3e09d67265f3","slug":"high-court-decision-to-make-bharwari-nagar-panchayat-as-municipal-council-is-justified","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट : भरवारी नगर पंचायत को नगर पालिका परिषद बनाने का निर्णय उचित, उच्चीकृत के विरोध में दायर याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट : भरवारी नगर पंचायत को नगर पालिका परिषद बनाने का निर्णय उचित, उच्चीकृत के विरोध में दायर याचिका खारिज
Sat, 02 Oct 2021 09:06 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 02 Oct 2021 09:06 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने नगर पंचायत को उच्चीकृत करने के विरोध में दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने आरटीआई रिपोर्ट को सक्षम प्राधिकारी की नहीं माना और कहा कि अधिशासी अधिकारी की जनसंख्या वृद्धि दर की रिपोर्ट तथ्यात्मक है।
विज्ञापन
Allahabad High Court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी की नगर पंचायत भरवारी को उच्चीकृत कर नगर पालिका परिषद बनाने की 26 अक्तूबर 16 की अधिसूचना को सांविधानिक करार दिया है। कहा है कि जनसंख्या वृद्धि प्रतिदिन हो रही है। पंचायत को परिषद में उच्चीकृत करना जनहित में है। इससे बेहतर विकास होगा। कोर्ट ने कहा कि जिलाधिकारी ने आपत्तियों पर विचार करने के बाद राज्यपाल को संस्तुति की और राज्यपाल ने संविधान के उपबंधों के तहत उच्चीकृत करने का फैसला लिया।
कोर्ट ने आरटीआई रिपोर्ट को सक्षम प्राधिकारी की नहीं माना और कहा कि अधिशासी अधिकारी की जनसंख्या वृद्धि दर की रिपोर्ट तथ्यात्मक है। अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने नगर पंचायत भरवारी को नगर पालिका परिषद उच्चीकृत करने की अधिसूचना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों व ग्रामीणों की तरफ से दाखिल सुषमा देवी, 8 अन्य, संतोष कुमार त्रिपाठी व 7 अन्य की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि 10 नवंबर 2014 के शासनादेश में निकायों के उच्चीकृत करने के मानक तय किए गए हैं। मानक के अनुसार वार्षिक आय, जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किमी के आधार पर निकाय को उच्चीकृत किया जा सकता है।
विज्ञापन
भरवारी नगर पंचायत के मामले में इसका ख्याल नहीं रखा गया है। शासनादेश का उल्लंघन किया गया है। 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या व घनत्व कम है। नगर पंचायत के लिपिक द्वारा जारी आरटीआई के अनुसार वार्षिक आय कम है।
सरकार का कहना था कि 2016 में अधिसूचना जारी की गई है। पिछले पांच सालों में जनसंख्या वृद्धि हुई है। वार्षिक आय पर अधिशासी अधिकारी ने रिपोर्ट दी है। याची की रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं है। सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट नहीं है। शासनादेश एक गाइड लाइंस है। निर्णय सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल द्वारा किया गया है। निर्णय संविधान के अनुच्छेद 243 एक्स के तहत लिया गया है।
विज्ञापन
कोर्ट ने आरटीआई रिपोर्ट को सक्षम प्राधिकारी की नहीं माना और कहा कि अधिशासी अधिकारी की जनसंख्या वृद्धि दर की रिपोर्ट तथ्यात्मक है। अनुच्छेद 226 के तहत दाखिल याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने नगर पंचायत भरवारी को नगर पालिका परिषद उच्चीकृत करने की अधिसूचना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों व ग्रामीणों की तरफ से दाखिल सुषमा देवी, 8 अन्य, संतोष कुमार त्रिपाठी व 7 अन्य की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि 10 नवंबर 2014 के शासनादेश में निकायों के उच्चीकृत करने के मानक तय किए गए हैं। मानक के अनुसार वार्षिक आय, जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व प्रति वर्ग किमी के आधार पर निकाय को उच्चीकृत किया जा सकता है।
विज्ञापन
भरवारी नगर पंचायत के मामले में इसका ख्याल नहीं रखा गया है। शासनादेश का उल्लंघन किया गया है। 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या व घनत्व कम है। नगर पंचायत के लिपिक द्वारा जारी आरटीआई के अनुसार वार्षिक आय कम है।
सरकार का कहना था कि 2016 में अधिसूचना जारी की गई है। पिछले पांच सालों में जनसंख्या वृद्धि हुई है। वार्षिक आय पर अधिशासी अधिकारी ने रिपोर्ट दी है। याची की रिपोर्ट विश्वसनीय नहीं है। सक्षम प्राधिकारी की रिपोर्ट नहीं है। शासनादेश एक गाइड लाइंस है। निर्णय सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल द्वारा किया गया है। निर्णय संविधान के अनुच्छेद 243 एक्स के तहत लिया गया है।