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हाईकोर्ट की टिप्पणी : जजों पर अनर्गल आरोप लगाना बना फैशन, स्थानांतरण अर्जी खारिज
Wed, 31 Jul 2024 06:07 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 31 Jul 2024 06:07 PM IST
सार
याची के अधिवक्क्ता अभय सिंह का कहना था कि उसके विरुद्ध दर्ज आपराधिक केस का विचारण अपर सत्र अदालत आगरा में चल रहा है। केस में गवाही हो रही है। याची का कहना था कि उसने शिकायतकर्ता को केस की सुनवाई कर रहे जज के चेंबर से बाहर आते हुए देखा। उसे आशंका है कि सेटिंग हो गई है और उसे सजा हो जाएगी।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि न्यायिक पीठासीन अधिकारी के विरुद्ध झूठे आरोप लगाना आजकल फैशन बन गया है। कोर्ट ने यह टिप्पणी याचिका की सुनवाई के दौरान की। याचिका में पीठासीन न्यायिक अधिकारी पर आरोप लगाकर केस अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की गई है, लेकिन कोई ठोस आधार नहीं दिया है। कोर्ट ने सत्र न्यायाधीश आगरा की ओर से आवेदन निरस्त करने को सही बताते हुए स्थानांतरण की अर्जी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव ने अर्जुन सिंह की अर्जी पर यह आदेश दिया है।
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याची के अधिवक्क्ता अभय सिंह का कहना था कि उसके विरुद्ध दर्ज आपराधिक केस का विचारण अपर सत्र अदालत आगरा में चल रहा है। केस में गवाही हो रही है। याची का कहना था कि उसने शिकायतकर्ता को केस की सुनवाई कर रहे जज के चेंबर से बाहर आते हुए देखा। उसे आशंका है कि सेटिंग हो गई है और उसे सजा हो जाएगी।
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21 नवंबर 23 को केस दूसरी कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अर्जी दी गई, जो निरस्त कर दी गई। याची का कहना है कि उसे संबंधित जज से न्याय की उम्मीद नहीं है। इसलिए केस दूसरी कोर्ट में भेजा जाए। विपक्षी अधिवक्ता डीसी द्विवेदी व शशिधर द्विवेदी का कहना था कि केस आखिरी स्टेज पर है। स्थानांतरण अर्जी पोषणीय नहीं है। इसलिए अर्जी खारिज की जाए।
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