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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court comment It is not job district administration to decide on the possession of disputed property.

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी : विवादित अचल संपत्ति पर कब्जे का फैसला करना जिला प्रशासन का काम नहीं

Tue, 18 Feb 2025 07:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 18 Feb 2025 07:21 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन का काम मौके पर शांति और सौहार्द बनाए रखना है। उन्हें विवादित अचल संपत्ति पर किसका कब्जा है या किसका कब्जा होना चाहिए यह निर्धारित करने का अधिकार नहीं है।

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High Court comment It is not job district administration to decide on the possession of disputed property.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिला प्रशासन का काम मौके पर शांति और सौहार्द बनाए रखना है। उन्हें विवादित अचल संपत्ति पर किसका कब्जा है या किसका कब्जा होना चाहिए यह निर्धारित करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने यह टिप्पणी करते हुए डीएम को विवादित संपत्ति का कब्जा याची को सौंपने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र एवं न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने अरुण प्रकाश शुक्ल की याचिका पर दिया।

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प्रयागराज के सोरांव तहसील के कटरा दयाराम गांव स्थित विवादित संपत्ति पर अपने कब्जे की सुरक्षा के लिए याची ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। याची का कहना था कि उसने यह संपत्ति राम नरेश मिश्र से खरीदी थी। राम नरेश के उत्तराधिकारियों का कहना था कि विक्रेता संपत्ति बेचने में सक्षम नहीं था। अदालत में इसे चुनौती दी, जो वर्ष 2013 में खारिज हो गई। अदालत ने याची के कब्जे को सही ठहराया। इस फैसले के खिलाफ अपील की गई है। उसमें कोई स्थगन आदेश नहीं दिया गया है।

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याचिका में कहा गया कि अपील लंबित रहने के दौरान प्रशासन ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए पुलिस सहायता से याची को संपत्ति से बेदखल कर दिया गया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी बेदखली का कोई भी आदेश अदालत ने नहीं दिया है। ऐसे में पूरी कार्रवाई अवैध है। वहीं, विपक्षी के वकील ने दलील दी कि प्रशासनिक हस्तक्षेप जरूरी था।

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कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को अचल संपत्ति के कब्जे या स्वामित्व के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है। वह किसी भी सिविल विवाद में न्यायिक निर्णय नहीं ले सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संपत्ति के स्वामित्व व कब्जे से संबंधित अंतिम निर्णय अपीलीय अदालत की ओर से किया जाएगा।

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