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Prayagraj News: सोशल मीडिया पोस्ट पर हाईकोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का नहीं कर सकती प्रयोग

Sat, 16 Dec 2023 12:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Sat, 16 Dec 2023 12:41 PM IST
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High Court cannot use its inherent powers on social media posts
Allahabad High Court Result - फोटो : Social Media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी पति की ओर से दहेज हत्या के मामले की निष्पक्ष विवेचना की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सोशल मीडिया की पोस्ट पर विचार के लिए अदालत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकती। यह फैसला न्यायमूर्ति वीके बिरला और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ ने मैनपुरी निवासी अभय गुप्ता की ओर से पत्नी की मौत के मामले में दर्ज दहेज हत्या की एफआईआर पर निष्पक्ष विवेचना की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
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मामला मैनपुरी के थाना कुरावली का है। याची की शादी हर्षिता के साथ 1 दिसंबर 2020 को हुई थीं। याची की पत्नी की लाश फंदे पर लटकी मिली थी। इसके बाद हर्षिता के भाई ने हर्षिता के पति अभय गुप्ता, ससुर सतीश चंद्र, सास मंजू, जेठ गौरव, जेठानी स्तुति निधि, देवर अजय , ननद और नंदोई के खिलाफ दहेज हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने सभी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस द्वारा दाखिल आरोप पत्र से क्षुब्द पति ने मामले की निष्पक्ष विवेचना की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी।
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आरोपी पति की दलील
याची की दलील थी कि पत्नी की मौत दहेज उत्पीड़न के कारण नहीं हुई है, बल्कि उसकी पत्नी ने अपने भाई की प्रेमिका की ओर से उसके संबंध में सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट वायरल किया गया था, जिसे लेकर वह सदमे में थी। इस कारण उसने आत्महत्या की है। इस बारे में उसकी पत्नी ने भाई की प्रेमिका के खिलाफ 19.10.2022 को शिकायती पत्र भी पुलिस को दिया था। उसने यह भी कहा कि पत्नी की मौत की खबर उसने खुद हर्षिता के मायके और महिला हेल्प लाइन को दी थी। विवेचनाधिकारी ने इन तथ्यों और सोशल मीडिया से संबंधित सुबूतों का न तो संकलन किया और न ही उसे केस डायरी का हिस्सा बनाया। यह पुलिस रेगुलेशन के अध्याय 11 पैरा 107 का उल्लंघन है।
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ठोस सुबूतों के बिना अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं
मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि यह सही है निष्पक्ष विवेचना पक्षकारों का मूल अधिकार है और इसके लिए अदालत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग कर सकती है, लेकिन उसके लिए पक्षकार को अदालत के समक्ष जांच एजेंसी के खिलाफ ठोस सबूत पेश करना होगा। कोर्ट ने कहा वर्तमान मामला एक नौजवान युवती को ससुराल में संदिग्धावस्था में मौत का है। आरोपी पति की ओर से मृतक के भाई की उस प्रेमिका की सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर आत्महत्या का दावा किया जा रहा है, जिसका परिवार से कोई संबंध ही नहीं है। इसके अलावा सोशल मीडिया पोस्ट पर विचार करने के लिए हाईकोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकती। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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