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इलाहाबाद हाईकोर्ट : फोटो आईडेंटिफिकेशन शुल्क बढ़ाने के मामले में बार को नहीं मिली राहत
Fri, 18 Nov 2022 11:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 18 Nov 2022 11:08 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा है कि यह वादकारियों पर अतिरिक्त भार है, जो सही नहीं है। अत:मामला विचारण योग्य है। कोर्ट ने मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को लिए भी कहा है। साथ ही प्रत्युत्तर हलफनामा भी मांगा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को फोटो आईडेंटिफिकेशन शुल्क बढ़ाए जाने के मामले में हाईकोर्ट ने राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए बढ़े हुए शुल्क पर रोक लगाते हुए इसे अवैधानिक बताया है। कहा, यह बिना किसी कानूनी प्रावधान के पारित किया गया प्रस्ताव है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत सिंह की खंडपीठ ने अभिषेक शुक्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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कोर्ट ने कहा है कि यह वादकारियों पर अतिरिक्त भार है, जो सही नहीं है। अत:मामला विचारण योग्य है। कोर्ट ने मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को लिए भी कहा है। साथ ही प्रत्युत्तर हलफनामा भी मांगा है। कोर्ट में याचियों की ओर से कहा गया कि बार ने 22 अक्तूबर और 31 अक्तूबर को प्रस्ताव पारित कर फोटो आईडेंटिफिकेशन शुल्क को 70 रुपये से बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दिया। यह शुल्क हाईकोर्ट एक्ट के अध्याय चार के नियम दो के तहत तय किया गया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भी यह स्पष्ट किया है।
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इस शुल्क को बढ़ाया नहीं जा सकता है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पास ऐसा कोई कानून नहीं है, जो इस शुल्क को बढ़ा दे। जबकि, बार की ओर से कहा गया कि वह अपने सदस्यों के भविष्य की सुरक्षा को देखते हुए ऐसा निर्णय ले सकती है। उसने बाईलॉज में संशोधन का प्रस्ताव किया है।
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इसकेलिए प्रारूप समिति गठित कर संशोधन के प्रस्ताव को सदस्यों के बीच रखने केलिए 16 नवंबर को आम सभा बुलाई गई थी। इसके अलावा 22 और 23 नवंबर को मतदान कराने का फैसला भी लिया गया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले को विचारणीय माना और बार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।