{"_id":"61f42bab4369b32b4e2529bc","slug":"high-court-bar-association-case-income-tax-tribunal-stayed-the-commissioner-s-order","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का मामला : आयकर न्यायाधिकरण ने आयुक्त के आदेश पर लगाई रोक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का मामला : आयकर न्यायाधिकरण ने आयुक्त के आदेश पर लगाई रोक
Sat, 29 Jan 2022 02:15 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 29 Jan 2022 02:15 AM IST
सार
न्यायाधिकरण के समक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सोसाइटी एक्ट की धारा (12एए) के तहत अपील की थी। उसकी मांग थी कि वह वकीलों की कल्याणकारी और गैरलाभकारी संस्था है।
विज्ञापन
allahabad high court
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन को एक कल्याणकारी संस्था माना है और इस आधार पर आयकर आयुक्त के आदेश को निरस्त करते हुए बार एसोसिएशन के मामले में फिर से विचार करने को कहा है। न्यायाधिकरण ने आयुक्त को आदेश दिया है कि वह इस मामले में विचारकर युक्तियुक्त निर्णय लें।
विज्ञापन
न्यायाधिकरण के समक्ष हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने सोसाइटी एक्ट की धारा (12एए) के तहत अपील की थी। उसकी मांग थी कि वह वकीलों की कल्याणकारी और गैरलाभकारी संस्था है। उसे सोसाइटी एक्ट के तहत करमुक्त किया जाए।
विज्ञापन
मामले में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन आयकर आयुक्त के आदेश को भी चुनौती दी थी। जिसमें आयकर आयुक्त ने बार एसोसिएशन को कर से छूट प्रदान करने से इंकार कर दिया था और कर निर्धारण वर्ष 2017-18 के आदेश के तहत 40 लाख रुपये कर की वसूली भी की।
विज्ञापन
आयकर आयुक्त के समक्ष अभी कर निर्धारण वर्ष 2016-17 का मामला विचारधीन है। न्यायाधिकरण के समक्ष बार एसोसिएशन का पक्ष कर सलाहकार पवन जायसवाल ने रखा। कहा कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन एक कल्याणकारी संस्था है।
यह वकीलों के हित में काम कर रही है। एसोसिएशन के पास सदस्यता शुल्क और हलफनामा सेंटर से प्राप्त रुपये के अलावा सावधि जमा के रूप में बची धनराशि के अलावा आय का कोई स्रोत नहीं है। यह रकम सिर्फ अधिवक्ताओं के हित में खर्च होती है।
लिहाजा, सोसाइटी एक्ट के तहत कर से छूट प्रदान की जाए। न्यायाधिकरण ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के तर्कों को सही माना और संस्था को कर से छूट प्रदान कर दी और आयकर आयुक्त को बार एसोसिएशन के पूर्व के मामलों में दिए गए आदेश पर फिर से विचार करने का आदेश पारित करते हुए युक्तियुक्त निर्णय का आदेश दिया।
न्यायाधिकरण ने इसके लिए छह महीने का समय भी निर्धारित किया है। न्यायाधिकरण के इस आदेश के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधाकांत ओझा ने कहा कि वह विभाग द्वारा जमा कराए गए 40 लाख रुपये के कर को वापसी के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे।